पच्चीस करोड़ का घोटाला

जम्मू। शेयर होल्डर और निवेशकाें की वेलफेयर एसोसिएशन ने फाइनेंस कंपनी द्वारा निवेशकों के 25 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की अपील को जनहित याचिका करार देने की अपील की। जेएंडके हाईकोर्ट के न्यायाधीश हसनैन मसूदी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले की सुनवाई को मुख्य न्यायाधीश एमएम कुमार के समक्ष रजिस्टर करने के आदेश दिए।
याचिका के अनुसार वर्ष 1986 मेें मेसर्ज शाइन फाइनेंस एंड इनवेसटमेंट इंडिया लिमिटेड कंपनीज एक्ट के तहत रजिस्टर हुई। इसी बीच, आरबीआई ने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया। कंपनी ने लोगों को उनके निवेश की एवज में भारी सूद देने का लालच दिया गया। लोगों ने भी प्रबंध निदेशक और निदेशकों के आश्वासन पर रकम जमा करानी शुरू कर दी। इसी तरह प्रतिवादी पक्ष नंबर सात व अन्य निदेशकों ने दो और कंपनियां बना ली। जिनका नाम शीन एग्रो एंड प्लांटेशन लिमिटेड और शाइन रोड लिंक लिमिटेड रखा। प्रतिवादी नंबर 7 से 23 तक इन तीन कंपनियों में एक दूसरे से जुड़े है। जब जमा कराई राशि को वापस देने का समय आया तो कंपनी कोई न कोई बहाना बनाकर टालने लगी। बाद लोगों की जमा राशि को वापस देने से पूरी तरह से इंकार कर दिया। गरीबों के करीब 25 करोड़ रुपये कंपनी ने हड़प कर लिए। निदेशकों ने लोगों के रुपये से काफी संपत्ति बनाई। कई बसें भी चलाई जा रही हैं। कुछ गाड़ियां खरीदकर अपने निजी काम के लिए उपयोग में लाई जा रही है। आरबीआई एक्ट के मुताबिक कंपनी को 50 लाख रुपये सिक्योरिटी जमा करानी होती है। बाद में पता चला कि रिजर्व बैंक के कुछ अधिकारियों से मिलकर 32 लाख रुपयेे भी कंपनी प्रबंधन ने निकाल लिए हैं। निदेशकों की शुरू से मंशा निवेशकों से धोखाधड़ी करने की थी। रिजर्व बैँंक व अन्य संबंधित एजेंसियों ने भी अपनी आरबीआई एक्ट के तहत जिम्मेदारी नहीं निभाई और फाइनेंस जमा की सिक्योरिटी राशि से भी लाखों रुपये निकाल ले गया। जिससे आशंका जताई जाती है कि आरबीआई कंपनी के भी कुछ लोग मिले हुए हैँ। याचिका में यह भी बताया गया कि कंपनी के प्रबंध निदेशकों ने बताया है कि उन्होंने कंपनी को नए निदेशकों को ट्रांसफर कर दिया है। नई प्रबंधन कमेटी यह कह रही है कि वह पुराने निदेशकों का खर्चा बर्दाश्त नहीं करेगी। जेएनएफ

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