रुड़की। हर साल बाढ़ से तबाही झेलने वाले ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक कहा कि उन्हें नुकसान का मुआवजा नहीं बल्कि समस्या का स्थायी समाधान चाहिए। इसके लिए भी वह शासन और प्रशासन से कोई मदद नहीं बल्कि तटबंध निर्माण के लिए नदियों से पत्थर उठाने की अनुमति चाहते हैं। लेकिन खनन पर प्रतिबंध होने के कारण प्रशासन ने इस मामले में हाथ खड़े कर दिए हैं। दो दिन पहले बुग्गावाला के ग्रामीणों ने धूलिया नदी पर क्षतिग्रस्त तटबंध के निर्माण के लिए श्रमदान शुरू कर दिया था। ग्रामीण…
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भूस्खलन से बचाव के उपाय खोजेंगे
रुड़की। उत्तराखंड भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कहर से कराह रहा है। सूबे में हुए जबरदस्त भूस्खलन के कारण तमाम भवन और सड़कें ढह गई हैं। भविष्य में ऐसे हालात पैदा न हों इसके लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) भूस्खलन से बचने के उपाय खोज रहा है। ताकि भूस्खलन से होने वाले वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके। सीबीआरआई रुड़की ने ‘इनवेस्टिगेशन ऑफ लैंड स्लाइड’ प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट की मदद से ऐसे स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है जहां…
Read Moreट्रेनें पटरी पर लौटीं, बसें अभी डगमग
हरिद्वार। तीसरे दिन ट्रेनें का संचालन तो पटरी पर लौट आया। लेकिन, बसों का संचालन डगमगाता रहा। दोपहर तक दिल्ली और मुरादाबाद हाईवे पर बसों की टाइमिंग ठीक हुई। लेकिन, चंडीगढ़ रूट पर बसों को वाया पोंटा साहिब भेजा गया। ऋषिकेश, देहरादून, रुड़की, लक्सर आदि स्थानीय रूटों पर भी बसों के लिए मारामारी रही। बीते दो दिन अंबाला में ट्रैक बाधित होने से अमृतसर-हरिद्वार जनशताब्दी एक्सप्रेस, अमृतसर-देहरादून लाहौरी एक्सप्रेस, ऋषिकेश-जम्मूतवी हेमकुंड एक्सप्रेस, गंगानगर-हरिद्वार गंगा नगर एक्सप्रेस, बाड़मेर एक्सप्रेस आदि ट्रेनों का संचालन बाधित था। लेकिन, बुधवार को सभी ट्रेनें समय…
Read Moreपहला मुआवजा दिया नहीं, दूसरे का आश्वासन
रुड़की। दैवीय आपदा आने पर शासन-प्रशासन पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए दावे तो बहुत करता है, लेकिन शासन-प्रशासन के दावे केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाते हैं। समय बीतने के साथ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए किए वादों को भी भूला दिए जाते हैं। सदियों में आई बारिश से हुए नुकसान का मुआवजा तो आज तक पीड़ितों को मिला नहीं, अब फिर से पीड़ितों को दैवीय आपदा से हुए नुकसान का मुआवजे का आश्वासन दिया जा रहा है। बीते जनवरी और फरवरी माह के प्रथम सप्ताह…
Read Moreराहत शिविरों में अव्यवस्थाओं अंबार
रुद्रप्रयाग। राहत शिविरों में रुके तीर्थयात्रियों ने अव्यवस्था की शिकायत की है। यात्रियों का आरोप है कि शिविरों में बिजली, पानी और शौचालय की व्यवस्था नहीं है। यही नहीं उन्हें खाना भी टूर ऑपरेटर ही खिला रहा है। राजस्थान से आए कल्याण जी ने बताया कि उनका करीब सौ यात्रियों का दल है। इनमें से 48 फाकी, जयपुर और 49 लोग तहसील वसी जिला दौसा से हैं। दो जून को उनका दल चारधाम यात्रा पर निकला, लेकिन 14 जून को उन्हें पुलिस ने गौरीकुंड से वापस भेज दिया। फिलहाल प्रशासन…
Read Moreखौफनाक यादों से कांप जाती है रूह
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ में आए मलबे के सैलाब से बचकर आए कुछ खुशनसीब यात्री उस मंजर को याद करके कांप उठते हैं। इस खौफनाक मंजर को ये ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। तीन दिन मौत के साए में बिताने के बाद राहत दल ने बुधवार को कई यात्रियों को बचाया। इनमें से कुछ को फाटा और गंभीर रूप से घायलों को जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग में भर्ती कराया गया है। यहां उन्होंने अपने अनुभवों को ‘अमर उजाला’ से साझा किया। तीस में से बचे सिर्फ दो हम तीस लोगों का दल ग्राम कल्योण,…
Read Moreसरकार और अफसरों पर भड़के लोग
रुद्रप्रयाग। आपदा के चार रोज बाद आए सीएम विजय बहुगुणा, आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य, मुख्य सचिव सुभाष कुमार को लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ी। लोगों ने प्रभावितों के बारे में सही जानकारी न मिलने और और रेस्क्यू ऑपरेशन को गंभीरता से न लेने पर आक्रोश व्यक्त किया। आक्रोश उस वक्त और बढ़ गया जबकि रेसक्यू को जा रहे जवानों के बजाय हैलीकाप्टर विधायक और अफसरों के हवाले कर दिया गया। इसके विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। सुबह 11 बजे अफसरों के साथ सीएम हेलीपैड पर उतरे। करीब 10…
Read More24 मकान नदी में बहे
तिलबाड़ा। आपदा के कारण चाका गांव की अनुसूचित जाति की बस्ती उजड़ गई है। यहां के दो दर्जन से अधिक गांव में उफनती नदी में समा गए हैं। करीब 60 हेक्टेयर खेती भी बाढ़ में बह गए हैं। फिलहाल प्रभावितों को प्राइमरी स्कूल में लगाए गए राहत शिविरों में रखा गया है, लेकिन पुलों की जर्जर हालत के कारण यहां आवाजाही संभव नहीं हो पा रही है। जिससे राहत और बचाव कार्य धीमी गति से चल रहे हैं। उधर, एसडीएम ललित नारायण मिश्र का कहना है कि अगर अगस्त्यमुनि तक…
Read Moreआपदा प्रबंधन के लिए अब सेना का सहारा
बागेश्वर। ग्लेशियरों के मार्ग पर द्वाली और कठलिया क्षेत्र में फंसे सैलानियों को अभी तक वहां से निकाला नहीं जा सका है। प्रशासन और पर्यटन विभाग को अभी तक इन लोगों की स्थिति और संख्या के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है। वहां कम से कम 75 यात्री और लगभग दो सौ भेड़पालकों के फंसे होने की आशंका है। रेस्क्यू के लिए मंगलवार को गई टीमें खाती से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। बुधवार शाम आपदा प्रबंधन विभाग और सेना का एक 79 सदस्यीय बचाव दल वहां के लिए रवाना…
Read Moreतटबंध नहीं बनने से महिलाएं बिफरीं
बागेश्वर। सरयू किनारे तटबंध नहीं बनने पर सैंज और तहसील मार्ग की महिलाओं में आक्रोश है। गुस्साई महिलाओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। उन्होंने सरयू नदी के किनारे 50 मीटर सुरक्षा दीवार लगाने की मांग की है। नीमा दफौटी के नेतृत्व में सैंज सेरा, तहसील मार्ग की महिलाओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी के साथ अपनी मांगें उठाईं। यहां हुई सभा में महिलाओं ने सरयू के किनारे तटबंध नहीं बनने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि 2010 में तटबंध बनाने की मांग प्रशासन से की गई थी। लेकिन आश्वासन के…
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