एनएचएआई लाएगा रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम , हाईवे पर नहीं रहेगी कोई खामिया

एनएचएआई  लाएगा रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम ,  हाईवे पर नहीं रहेगी कोई खामिया

देश में बन रहे राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी अब कागजी रिपोर्ट और साइट विजिट तक सीमित नहीं रहेगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने जा रहा है, जिससे हर प्रोजेक्ट की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।

इसके लिए एनएचएआई हाईवे इंफॉर्मेशन मॉडलिंग प्लेटफॉर्म (एचआईएमपी) विकसित करेगा। यह प्लेटफाॅर्म हाईवे निर्माण के पूरे जीवनचक्र को डिजिटल रूप से ट्रैक करेगा। शुरुआत में इस प्लेटफॉर्म का उपयोग देश के आठ चुनिंदा परियोजनाओं पर लागू किया जाएगा। इसके बाद इसे सभी परियोजनाओं पर उपयोग किया जाएगा।

यह प्लेटफॉर्म डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) से लेकर निर्माण और ऑपरेशन-मेंटेनेंस तक हर चरण को कवर करेगा। खास बात यह है कि इसमें 5डी मॉडलिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसमें डिजाइन, समय और लागत को एक साथ जोड़कर प्रोजेक्ट की स्थिति को लाइव ट्रैक किया जा सकेगा। इससे पहली बार हाईवे प्रोजेक्ट्स की प्रगति का एक समग्र और सटीक डिजिटल चित्र तैयार होगा।

नई प्रणाली लागू होने के बाद एनएचएआई और संबंधित एजेंसियों को किसी प्रोजेक्ट की प्रगति जानने के लिए फील्ड विजिट या अलग-अलग रिपोर्ट्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सभी डेटा एक केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा। प्रोजेक्ट की प्रगति, देरी और लागत से जुड़ी जानकारी रियल-टाइम में अपडेट होगी, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक बनेगी।

आठ प्रोजेक्ट पर लागू होगा प्लेटफॉर्म
एनएचएआई का नया हाईवे डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म शुरुआती चरण में देश के आठ चुनिंदा प्रोजेक्ट्स पर लागू किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट देश में भर में फैले हुए हैं। इसमें ओडिशा का रामेश्वरम–पुरी–रतनपुर कॉरिडोर, झारखंड-बिहार-पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला मोरेग्राम–किशनगंज मार्ग और हिमाचल प्रदेश का शिमला–मतौर कॉरिडोर जैसे डीपीआर स्टेज के प्रोजेक्ट शामिल हैं। वहीं निर्माणाधीन परियोजनाओं में आगरा–ग्वालियर ग्रीनफील्ड और बायपास, पश्चिम बंगाल का खड़गपुर–मोरेग्राम मार्ग, शिमला–मतौर कॉरिडोर के अलावा वाराणसी के गंगा और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल हैं।

अलग-अलग संरचनाओं में होगी सिस्टम की परख
इन प्रोजेक्ट्स का चयन इस तरह किया गया है कि अलग-अलग भौगोलिक और तकनीकी परिस्थितियों जैसे पहाड़ी, मैदानी और एलिवेटेड संरचनाओं में सिस्टम की क्षमता को परखा जा सके। यही प्रोजेक्ट्स आगे देशभर में इस डिजिटल मॉडल के विस्तार की दिशा तय करेंगे। यह प्लेटफॉर्म बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग और डिजिटल ट्विन जैसी आधुनिक तकनीकों पर आधारित होगा। इसके जरिए हाईवे प्रोजेक्ट्स का एक वर्चुअल मॉडल तैयार किया जाएगा, जिससे किसी भी बदलाव के प्रभाव को पहले से समझा जा सकेगा।

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