
गोहर (मंडी)। जनपद के अधिष्ठाता बड़ा देव कमरूनाग के मंदिर में 28 जून के बाद लगातार पांच दिन महिलाओं का मंदिर परिसर में प्रवेश निषेध रहेगा। यह बड़ा देव कमरूनाग का फरमान है। पांच दिन तक कमरूनाग मंदिर परिसर में महिलाएं और युवतियां प्रवेश नहीं कर सकती। श्रद्धालु अगर जातर लेकर बड़ा देव कमरूनाग के मंदिर में आएंगे तो उनकी जातर भी देवता स्वीकार नहीं करेंगे। बड़ा देव कमरूनाग में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह बुरी खबर है लेकिन बड़ा देव की ऐतिहासिक पवित्र झील की सफाई का कार्यक्रम शुरू होने के चलते देवता ने यही फरमान जारी किया है। 29 जून से लेकर तीन जुलाई तक बड़ा देव की पवित्र कमरूनाग झील की सफाई की जाएगी। इस पवित्र कार्य के दौरान अगर कोई महिला कमरूनाग मंदिर परिसर की सीमा लांघती है तो पवित्र झील के सफाई अभियान में खलल पड़ सकता है।
बड़ादेव के कड़े दिशा निर्देशानुसार मंडी कमरूनाग मंदिर कमेटी और सुकेत की रोहांडा कमरूनाग मंदिर कमेटी ने देवता द्वारा जारी इस फरमान पर कड़ा संज्ञान लिया है। दोनों कमेटियों ने चारों ओर ऐलान कर दिया है कि कमरूनाग देवता की झील के सफाई कार्यक्रम के दौरान कुल पांच दिन तक श्रद्धालु और पर्यटक कमरूनाग मंदिर पहुंचने में परहेज ही रखें। रोचक पहलु यह है कि कमरूनाग झील रियासतकाल से आधी मंडी और आधी सुकेत के हिस्से में आती है। इस झील की सफाई दोनों रियासतों के कारदार संयुक्त रूप से करते हैं। मंडी कमरूनाग मंदिर कमेटी के प्रधान निर्मल सिंह ठाकुर ने बताया कि कमरूनाग देवता की झील की सफाई कार्यक्रम को लेकर मंदिर कमेटी ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। कमरूनाग मंदिर कमेटी रोहांडा (सुकेत) के प्रधान देवेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि झील की शांतिपूर्वक सफाई हो इसके लिए महिलाएं और युवतियां इस दौरान मंदिर परिसर की सीमा न लांघे। बहरहाल बड़ा देव कमरूनाग की पवित्र झील (सर) की सफाई को लेकर देवता के कारदारों में खासा उत्साह है।
तो गायब हो जाएंगे कारदार
कमरूनाग की झील की सफाई के दौरान अगर कोई महिला गलती से देवता परिसर में प्रवेश करती है तो झील में सफाई करने के लिए गए कारदारों के झील में डूबने का खतरा पैदा हो जाता है। महिलाओं की मौजूदगी से बड़ा देव क्रोधित हो जाते हैं और कारदार झील में अदृश्य हो सकते हैं। यह मान्यता है।
झील की परिक्रमा से जागते हैं बड़ा देव
देवता की पवित्र झील की सफाई से पूर्व रात को बड़ा देव कमरूनाग को देवता के गूर झील की परिक्रमा करके जगाते हैं। देवता की रात को जाग में करीब आधा दर्जन बकरों की बलि के बाद इसकी सुबह झील की सफाई का काम कारदारों द्वारा शुरू किया जाता है।
पांच दिन तक रहेगा कारदारों का पहरा
झील की सफाई के दौरान पांच दिन तक दिन रात कारदारों का देवता की सीमा पर कड़ा पहरा रहेगा। कोई महिला गलती से देवता की सीमा में आती है तो कारदार उसे वहीं से वापस घर भेज देंगे। झील की सफाई के दौरान देवता के मंदिर में यज्ञ भी जारी रहेगा।
मंदिर में जातर लेकर न आएं भक्त
कमरूनाग देवता की झील की सफाई के समय कोई भी श्रद्धालु देवता मंदिर में जातर लेकर नहीं आए। खासकर महिलाएं देवता के मंदिर परिसर में पांच दिन तक प्रवेश करने से दूर रहें।
……….धर्मदत्त, गूर बड़ा देव कमरूनाग।
