
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। हिमाचल संस्कृत अकादमी ने ज्वालामुखी में राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में प्रदेश भर से आए करीब 300 विद्वानों ने मांगों को पूरा करवाने का मंच के माध्यम से संकल्प लिया। हिमाचल प्रदेश संस्कृत शिक्षक परिषद ने इस दौरान अपनी दो मांगाें को उठाया। इसमें सभी शास्त्रियों को समान वेतन देने और 10 जमा दो में संस्कृत अध्यापकों के स्थायी पद सृजित की मांग शामिल हैं। राज्य स्तरीय सम्मेलन मेें बतौर मुख्य अतिथि निदेशक हरियाणा अकादमी डा. सुधीर कुमार ने शिरकत की।
सचिव डा. मस्तराम ने कहा कि जिन विद्वानों की आयु 60 वर्ष से अधिक है, उनमें से राष्ट्रीय सम्मान पत्र के लिए हिमाचल संस्कृत अकादमी शिमला की ओर से चयन किया जाएगा। इमसें भाग लेने के लिए 20 अप्रैल तक शिमला कार्यालय में अपना जीवन ब्योरा देना होगा। इसके अलावा 30 से 40 वर्ष की आयु के विद्वानों को वादरायण पुरस्कार से राष्ट्रपति की ओर से सम्मानित करवाया जाएगा। उन्होंने शिमला कार्यालय में 20 अप्रैल तक अपना जीवन ब्योरा देने के लिए कहा। डा. सीता राम ठाकुर ने भी इस अवसर पर संबोधित किया। डा. प्रेमलाल गौतम ने दिवाकर दत्त शर्मा की संस्कृत सेवा का बखान किया। डा. ओम प्रकाश शर्मा ने हिमालय की समूची सभ्यता का बखान किया। डा. मनोहर लाल आर्य ने हिमाचल में संस्कृत की उपयोगिता पद्म रूप में शोध प्रस्तुत किया।
हिमाचल संस्कृत अकादमी के सचिव डा. मस्तराम शर्मा ने कहा कि डा. मदन मोहन शर्मा, डा. मनोहर लाल, डा. प्रेमला, डा. सीता राम, रतन चंद शर्मा, शशी कांत गौतम, गोविंद राम, धनश्याम उनियाल, पुरुषोत्तम लाल, शंकर वशिष्ठ, डा. भक्त वत्सल, आचार्य रामानंद, प्रदेशाध्यक्ष संस्कृत शिक्षक परिषद रामस्वरूप शास्त्री, डा. केशवानंद, प्रवीण शास्त्री और प्रबल शर्मा ने भी कविता से समां बांधा।
