
पेशावर: पाकिस्तान में पोलियो के खिलाफ चल रही मुहिम पर आतंकवाद भारी पड़ रहा है। तालिबान और कट्टरपंथी आतंकी संगठन पोलियो अभियान चलाने वाले लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं और ऐसे हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है।
तालिबान के अनुसार, असल में यह पोलियो अभियान मुस्लमानों को ‘नपुसंक’ बनाने की पश्चिमी साजिश है। इसके साथ ही तालिबान इसे अमेरिकी जासूसी का जरिया भी बताता रहा है। पोलियो कार्यक्रम से जुड़े एक डॉक्टर ने ही अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के ठिकाने से जुड़ी सूचना अमेरिकी सेना को दी थी। तालिबान ने पिछले साल जून में ड्रोन हमलों के विरोध में पोलियो कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ने देने की बात कही थी।
शनिवार को पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में पोलियो के खिलाफ 90 दिवसीय अभियान से ठीक पहले एक अस्पताल पर हमला करके पोलियो का टीका लगाने वाले की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आंतकी पेशावर के मतनी अस्पताल में घुस गए और और अंधाधुंध गोलियां चलाईं। गोलीबारी में पोलियो का टीका लगाने वाले जाहिद गुल की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रुप से घायल हो गए। इस घटना की किसी भी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इस हमले के लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
13 दिसंबर को हुए हमले में भी एक पोलिया अभियान कार्यकर्ता और दो पुलिसवालों की मौत हो गई थी। 23 नवंबर को अभियान से जुड़े कुछ शिक्षकों का अपहरण कर लिया गया था। देश के उत्तर और दक्षिण वजीरिस्तान इलाके में लगभग 2,60,000 बच्चों को पोलियो वैक्सीन दिया जाना है।
