
रंगस (हमीरपुर)। छात्रों ने अपनी सोच को मॉडल के जरिए पेश किया। मॉडल्स को देख ऐसा लग रहा था कि मानों वैज्ञानिक सामने खड़े हों। बनाए ही थे ऐसे मॉडल्स जो किसी वैज्ञानिक के द्वारा बनाए गए मॉडल्स से कम नहीं थे। मौका था दो दिवसीय बाल विज्ञान सम्मेलन को जो रंगस विद्यालय में मंगलवार को शुरू हुआ। इसमें 71 स्कूलों के करीब 255 विद्यार्थी अपनी कला का नमूना पेश कर रहे थे। जिला विज्ञान पर्यवेक्षक अश्वनी चंबयाल मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि विज्ञान का बहुत बड़ा महत्व है। देश के विकास के लिए वैज्ञानिक सोच आवश्यक है। बाल विज्ञान सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक उपलब्धियों की जानकारी एवं जागरूकता है। सम्मेलन में बच्चों को एक्टिविटी कार्नर से रोजाना की गतिविधियों को विज्ञान के साथ जोड़कर उनकी जिज्ञासाओं को दूर करना है। देश में ऊर्जा की समस्या को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा के साधनों, उपयोगों तथा संभावनाओं पर बच्चे भिन्न-भिन्न माडल तैयार कर नई सोच विकसित कर रहे हैं। चंबयाल ने अध्यापकों से कहा कि समय आ गया है कि अध्यापक विज्ञान को दैनिकचर्या से जोड़कर सरल बनाकर बच्चों को पढ़ाएं। विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद तथा शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान से सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। जिला विज्ञान अध्यापक संघ के प्रधान केवल सिंह ने बच्चों को विज्ञान के महत्व पर बल दिया। कार्यक्रम में विज्ञान अध्यापक संघ के महासचिव सुरेंद्र पठानिया, प्रवीण सिंह, सुशील पठानिया, कुलदीप चौहान, विक्रम मन्हास, राकेश रौकी, संजीव कुमार, प्रीतम चंद, नरेंद्र मुसाफिर, विशाल ढटवालिया, मुकेश कुमार, रविंद्र ठाकुर, नरेश कुमार व सुशील कुमार सहित अन्य शिक्षक भी उपस्थित थे।
