निजी स्कूलों में स्वास्थ्य योजना का लाभ नहीं

चंबा। प्रदेश सरकार निजी स्कूलों में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों के साथ भेदभाव कर रही है। सरकार द्वारा चलाई जा रही विद्यार्थी स्वास्थ्य योजना के तहत केवल सरकारी स्कूलों के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। निजी स्कूलों के बच्चे हर वर्ष बिना सरकारी सहायता मेरिट लिस्ट में स्थान पाते हैं। इसके बावजूद इन बच्चों को सरकार की स्वास्थ्य योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। निजी स्कूलों में स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन न होना सरकार के दावों को खोखला साबित कर रहा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में जिला चंबा में 157 के करीब प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं। इसमें 56 के करीब प्राइमरी स्कूल और 70 मिडल स्कूल शामिल हैं। 7 सीनियर सेकेंडरी और 15 हाई स्कूल मौजूद हैं। इन स्कूलों में मौजूदा समय में तकरीबन 10 हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यार्थी स्वास्थ्य योजना के तहत इन बच्चों के स्कूलों में न तो स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है और न ही विद्यार्थियों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। जिला में 1496 हाई व प्राइमरी तथा 88 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इनमें हर वर्ष स्वास्थ्य विभाग की टीमें जाती हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विद्यार्थियों का स्वास्थ्य जांचा जा रहा है। गंभीर बीमारी वाले बच्चों को क्षेत्रीय अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ऐसे छात्रोें का मुफ्त इलाज अस्पताल में किया जाता है। निजी स्कूलों में पढ़ रहे करीब दस हजार बच्चों का विद्यार्थी स्वास्थ्य योजना के तहत इलाज न होना भी इस योजना की सफलता पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राकेश वर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सरकार के आदेशानुसार सरकारी स्कूलों में समय-समय पर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। निजी स्कूलों में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने के कोई आदेश नहीं है।

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