
श्रीनगर। बीते 16 जून की रात केदारनाथ हादसे के शिकार हुए सात घायलों का इलाज बेस अस्पताल में चल रहा है। दो दिनों बाद घायलों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ तो उन्होंने अपनी व्यथा बताई।
मध्य प्रदेश के किरोड़िया गांव निवासी 16 वर्षीय मामू सिंह ने बताया कि हमारा 30 लोगों का ग्रुप था। 15 जून को वे सोनप्रयाग में रुके। हमें केदारनाथ में दर्शन कर गौरीकुंड पहुंचना था। रात के करीब नौ बजे थे और रामबाड़ा से तीन किमी नीचे पहुंच गए थे। इसी समय भारी मलबा पीछे से आया। इसमें से चार लोगों को मलबा साथ ले गया। मैंने अपने मामा बालू सिंह, मामी और उनकी 13 वर्षीय बेटी तथा 35 वर्षीय गेंदीबेन को मलबे में दफन होते हुए देखा। मैं भी इसी मलबे के जोर से छिटककर गिरा। मलबे से रीढ़ की हड्डी के समीप तथा पैर में बहुत चोट आई। उस रोज केदारनाथ के रास्ते पर यात्रियों के पास मुड़ने के लिए तक जगह नहीं थी।
भारत नामक ट्रेवल एजेंसी के यात्रियों के लिए खाना बनाने वाले महाराज अमित को पसलियों तथा पैरों में चोटें आई हैं। वह कहते हैं कि 16 तारीख की रात जब खाना बना रहा था, तो तेज आवाज के साथ आए पानी के बहाव ने उसे दूर छिटका दिया। 17 की सुबह मंदिर के भीतर जाकर अपनी जान बचाई। मध्यप्रदेश के रामसिंह, गुप्तकाशी के केशरी शुक्ला व आशुतोष शुक्ला, कलकत्ता के राजेंद्र तथा नेपाल मूल का एक युवक बेस अस्पताल में इलाज ले रहा है।
