
बागेश्वर। पिंडारी और सुंदरढुंगा ग्लेशियर के मार्गों पर फंसे यात्रियों को अंतत: सेना की रेस्क्यू टीमें सुरक्षित वापस ले आई। पिंडारी ग्लेशियर की टीम लगातार छह दिनाें के तनाव के बाद शनिवार की रात यहां पहुंची। सुंदरढुंगा की टीम को लेकर सेना का बचाव दल रविवार की शाम लोहारखेत तक ले आया।
16 जून को मूसलाधार बारिश के कारण मार्गों पर फंसे यात्रियों को वापस लाने में आपदा प्रबंधन तंत्र लाचार हो जाने पर जिलाधिकारी भूपाल सिंह मनराल ने सेना से मदद मांगी। गोरखा रेजीमेंट का 82 सदस्यीय बचाव दल 19 को अल्मोड़ा से यहां पहुंचा। सर्वाधिक समस्या पिंडारी ग्लेशियर मार्ग पर द्वाली में फंसे यात्रियों की थी। सेना का एक दल पैदल खाती से आगे को बढ़ा। इस दल ने पिंडर पर पुल का निर्माण किया। दूसरा दल हैलीकाप्टर से फुरकिया में उतरा और रास्ता बनाते हुए द्वाली पहुंचा तब तक गाइड रूप सिंह आदि की मदद से बाधाओं को पार करते हुए स्कूली बच्चे और अन्य यात्री वापस आने लगे थे। सेना का बचाव दल मलियादौड़ में इन यात्रियों को मिला और सकुशल वापस ले आया। यह कार्रवाई बटालियन के सीओ कर्नल प्रशांत कुमार कांडपाल की देखरेख में चली। विधायक ललित फर्स्वाण भी इस कार्रवाई में साथ थे। अन्य यात्रियों के फंसे होने की आशंका से एक अन्य बचाव दल ने पूरे यात्रा रूट पर तलाशी अभियान चलाया। सेना का एक अन्य बचाव दल सुंदरढुंगा ग्लेशियर के समीप फंसे मुंबई के कमोडोर पीके सिंह, उनकी पत्नी रुचिरा सिंह, पुत्र नील और सत्या शरण सहित साथियों को लेने गया था। रविवार की शाम सेना का बचाव दल कमोडोर सिंह और अन्य लोगों को लेकर लोहारखेत पहुंच गया। सोमवार को यह दल बागेश्वर पहुंच जाएगा। विधायक श्री फर्स्वाण ने कहा कि सेना के सहयोग से यात्रियों को बचाया जा सका।
