
हमीरपुर। हर रोज आसमान की ओर निहार रहे किसानों के चेहरों पर आखिर रंगत आ ही गई जब शनिवार शाम को बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी के बाद रात भर तेज बारिश हुई। इससे फसल को जहां संजीवनी मिली वहीं किसानों की चिंता भी कम हुई। किसान बारिश के ही इंतजार में थे। अगर बारिश नहीं होती तो गेहूं की फसल को काफी नुकसान होता। दिसंबर में बारिश न होने के कारण करीब 40 फीसदी फसल प्रभावित हो जाती थी। बारिश से किसानों में अच्छी फसल की आस जग गई है। शनिवार शाम को शुरू हुई बारिश रात भर होती रही। रविवार को भी दिनभर बादल छाए रहे। पहली बारिश ने अच्छी फसल की आस बंधाई है, पशुचारा भी भरपूर होने की उम्मीद किसानों में जगी है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो शनिवार शाम के पश्चात रविवार सुबह तक हुई बारिश फसल के लिए काफी अच्छी है और बारिश न होने के कारण फसल प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा था। फिलहाल बारिश के बाद संकट टल गया है और आगे भी सही समय पर बारिश होती रही तो उम्मीद के अनुसार अच्छी फसल होगी। कृषि विभाग की मानें तो जिला में लगभग 33 हजार 400 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल की बिजाई की जाती है। इसमें हर वर्ष औसतन 59 हजार 500 मिट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है। अधिकांश भूमि पर फसल का उत्पादन बारिश पर निर्भर करता है।
विभाग बोला, संजीवनी बनी बारिश
कृषि उपनिदेशक डा. रमेश का कहना है कि बारिश गेहूं की फसल के लिए बहुत अच्छी है। बारिश से गेहूं का उत्पादन ठीक होगा। पशुचारे और अन्य नकदी फसलों के लिए भी बारिश ने संजीवनी का काम किया है। दिसंबर में बारिश नहीं होती तो गेहूं की फसल को 40 फीसदी नुकसान होने का अनुमान था। शनिवार रात बारिश के बाद अच्छी फसल होने की उम्मीद बंधी है।
…तो मेहनत पर फिर जाता पानी
किसानों भगवान दास, किशन कुमार, कशमीर सिंह, मुंशी राम, रविदत्त शर्मा, राजेश कुमार, सुखविंद्र सिंह, नरेंद्र ठाकुर, रविंद्र ठाकुर, सुरेंद्र शर्मा, विक्रम सिंह, विरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि कुछ दिन और बारिश नहीं होती तो सारी मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा था। बारिश न होती तो फसल के साथ-साथ पशुचारे की कमी से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़नी थी। किसानों का कहना है कि कुछ वर्षों से मौसम में आए बदलाव के कारण काफी नुकसान हुआ है।
