
रुद्रप्रयाग। अंकल पानी में हमारी अंक तालिकाएं, प्रमाण पत्र और कॉपी-किताब बह गए। हमारे जीजाजी का ड्राइविंग लाइसेंस, फोटो पहचान पत्र और भतीजे के जन्म प्र्रमाण पत्र का भी पता नहीं है। प्लीज हमारे प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकार से कह दो। अगस्त्यमुनि रिलीफ सेंटर में रह रही मीरा और रेखा ने भरे गले से यह अनुरोध किया। मीरा ने इसी साल इंटरमीडिएट और रेखा ने हाईस्कूल उत्तीर्ण किया है।
ऐसी ही हालात बाढ़ प्रभावित क्षेत्राें के अन्य स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं का है। इस माहौल में सरकार से उन्हें मदद की दरकार है। प्रमाण पत्र खोने के बाद नए बनाने की प्रक्रिया खर्चीली और जटिल है। एफिडेविट, समाचार पत्र में प्रकाशन और इसके बाद विवि या स्कूल बोर्ड से नया प्रमाण पत्र हासिल करने मेें वक्त लग जाता है। छात्र प्रवीण नेगी और राकेश रावत कहते हैं कि आपदा की घड़ी मे सब कुछ लुट गया है। प्रमाण पत्र हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। अब प्रमाण पत्र बनानेे के लिए जाए तो कहां।
राज्य मीडिया सलाहकार समिति के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना है कि राजस्व विभाग द्वारा आपदा प्रभावित घरों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसी दौरान उन सभी छात्र-छात्राओं के नाम लिखकर संबंधित संस्थाओं को दिए जाने चाहिए, जिनके प्रमाण पत्र बाढ़ की भेंट चढ़ गए। संबंधित संस्था की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह निशुल्क प्रमाण पत्र बना कर दें।
