
बागेश्वर। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर रविवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में यहां चिकित्सकों, हेल्थ वर्करों की एक दिवसीय गर्भधारण और प्रसव पूर्व निदान तकनीक कार्यशाला संपन्न हुई। प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला जज एनएस धानिक ने चिकित्सकों से पीएनडीटी एक्ट (प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स) का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।
मुख्य चिकित्साधिकारी सभागार में जिला जज ने पीएनडीटी एक्ट की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कानून और जागरूकता से घटते लिंगानुपात पर काबू पाया जा सकता है। अतिरिक्त जिला जज नीलम रात्रा ने कहा कि एक्ट में तीन साल की सजा और एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नसीम अहमद ने कहा कि लिंग की जांच करना और उसकी गर्भ में हत्या करना कानूनन अपराध है। आज पूरे देश में लिंगानुपात घट रहा है। उन्होंने बताया कि एक्ट में लिंग जांच करने पर संबंधित चिकित्सक, संस्थान के मुखिया और कर्मचारियों को भी सजा का प्रावधान है। कोई भी चिकित्सक प्रसव से पूर्व लिंग जांच किसी भी हाल में नहीं करे। जिला बार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विनोद भट्ट, पूर्व अध्यक्ष गोविंद भंडारी, कुंडल सिंह धपोला और एडवोकेट हरीश जोशी ने भी कानूनी जानकारी दी। इस अवसर पर डिप्टी सीएमओ डा. जेसी मंडल, डा.वीके सक्सेना, डा. रीमा उपाध्याय, डा. नरेंद्र सिंह टोलिया, दलीप खेतवाल, देवमुनि महाराज, आशा वर्कर्स, एनएम और हेल्थ वर्कर्स, दिवाकर वर्मा, अनूप कांडपाल आदि मौजूद थे।
