हिमाचल सरकार द्धारा लाए गए इस अहम बिल को राज्यपाल ने दी स्वीकृति
प्रदेश में चिट्टे के मामलों में संलिप्त लोग चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। जीतने के बाद अगर जनप्रतिनिधि दोषी पाया जाता है तो ऐसी स्थिति में उसे कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा। राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज संशोधन अधिनियम 2026 को मंजूरी दे दी। बजट सत्र में इस संशोधन विधेयक को विधानसभा में लाया गया था। सत्ता पक्ष व विपक्ष के विधायकों की विस्तृत चर्चा के बाद पारित इस विधेयक को मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया। सरकार के इस फैसले को नशे पर शिकंजे के साथ पंचायत स्तर पर स्वच्छ छवि के प्रतिनिधियों को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हिमाचल में लंबे समय से चिट्टे के बढ़ते मामलों को लेकर यह कड़ा प्रावधान किया गया है। इससे पंचायत चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की भागीदारी पर रोक लगेगी और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही ग्राम सभाओं की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाने के लिए भी अहम बदलाव किया गया है। हिमाचल प्रदेश में चिट्टा पांव पसारता जा रहा है। प्रतिदिन हिमाचल के किसी न किसी कोने में आरोपियों को चिट्टे के साथ पकड़ा जा रहा है।
ग्राम सभाओं में कोरम पूरा करने को अब वोटरों का 1/10 भाग अनिवार्य