
पिथौरागढ़/मुनस्यारी। 16,17 जून के कुदरती प्रलय से मुनस्यारी तहसील का मदकोट बुरी तरह थर्राया है। मदकोट बाजार में ही खासी तबाही मची है। आठ दुकान, मकान समेत कई सरकारी भवन गोरी नदी में समा गए हैं। सड़क, पैदल मार्ग, झूलापुल बह गए हैं। लुम्ती झूलापुलबहने से 100 लोग फंसे हैं। बसंतकोट झूलापुल क्षतिग्रस्त होने से पांच हजार की आबादी गांवों में कैद होकर रह गई है। प्रभावित लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। राहत के नाम पर प्रशासन का एक आदमी भी इन इलाकों में नहीं पहुंचा है।
जौलजीबी से छह किमी दूर बलमरा से 50 किमी दूर मदकोट तक सड़क जगह-जगह में ध्वस्त हो गई है। लोगों को दस, दस किमी तक पहाड़ी में चढ़ना पड़ रहा है। कई स्थानों में पैदल चलने को भी रास्ता नहीं बचा है। बात मुनस्यारी से मदकोट की कनेक्टविटी की करें तो मदकोट से चार किमी पहले भदेली नामक स्थान से मदकोट तक दो स्थानों में सड़क का अता पता ही नहीं है। बंगापानी, मदकोट, छोरीबगड़, घट्टाबगड़, सेराघाट में आसमानी प्रलय ने जबरदस्त तबाही मचाई है।
छोरीबगड़, घट्टाबगड़, सेराघाट में सैकड़ों परिवार आपदा से प्रभावित हैं। 40 परिवार बेघर हो गए हैं। प्रशासन इन लोगों को टैंट तक मुहैया नहीं करा पाया है। झूलापुल टूटने से गोरीछाल की पांच हजार आबादी घरों में कैद हो गई है। भूस्खलन से बर्बाद लुम्ती के घरुड़ी और मलकोट गांव में 100 लोग फंसे हैं। फंसे लोगों के पास भोजन सामग्री समाप्त हो गई है।
