
पिथौरागढ़/धारचूला/मुनस्यारी/मदकोट। जिले में अभी भी 1000 से अधिक लोगों को राहत का इंतजार है। आज सेना ने तेजम से 24, नागलिंग से 9 लोगों को निकाला। निकाले गए यात्रियों में चंपावत के पुलिस अधीक्षक केएस नागन्याल भी हैं। जबकि दूसरे राहत दल ने खरसा पोंटिंग में फंसे 27 लोगों को लिलम पहुंचाया जा रहा है। फगवा जगह में बेघर हुए तीन परिवारों में से एक ने गुफा में शरण ली है। जबकि दो परिवार मुनस्यारी और मदकोट मेें रह रहे हैं।
वैसे मौसम की खराबी की वजह से हवाई सेवा से राहत कार्य अपराह्न दो बजे बाद शुरू हो सका। धारचूला में 2 बजे बाद सेना के दो हेलीकॉप्टर आए। साथ ही सांसद प्रदीप टम्टा और कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक दीपक रावत रविवार को धारचूला में डटे रहे। डीएम डा.नीरज खैरवाल का कहना है कि राहत कार्य और रसद सामग्री को पहुंचाया जा रहा है।
सेना के कमांडिंग आफिसर सुनील कटारिया ने बताया कि सेना टैंट और खाद्य सामग्री बांटी है। राहत कार्य में तेजी लाई जाएगी। दारमा में पशु चिकित्सा विभाग की टीम को भी निकाल लिया गया। इसके अलावा मुनस्यारी से 40 किमी पैदल मार्ग पर पोंटिंग से 35 लोग अपने प्रयासों से निकल सके। रास्ते टूटे होने से ये लोग जान जोखिम में डालकर चट्टानों के जरिए यहां पहुंचे। एसडीएम प्रमोद कुमार का कहना है कि प्रशासन की प्राथमिकता दुर्गम स्थिति में फंसे लोगों को निकालना है।
आपदा नियंत्रण कक्ष के मुताबिक आपदा में फंसे लोगों की संख्या 320 है। लेकिन विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी में ये संख्या अभी भी करीब 1000 है। जिला आपदा नियंत्रण अधिकारी आरएस राणा का कहना है कि अभी तक 320 मकानों के टूटने की सूचना है। वहीं बोडियार में लकड़ी का पुल लगाकर नाहर देवी तक पैदल आवाजाही सुचारू कर दी गई है। सेरा, सेराघाट, दानीबगड़, मोतीघाट, लोधिबगड़ में खाद्यान्न की दिक्कत हो रही है। देवीबगड़ नामक जगह में 12 परिवार बेघर हुए हैं। छह परिवार टीआरसी में और छह परिवार अपने रिश्तेदारों के घर गए हैं।
