सांसदों पर लागू हो नो वर्क नो पे: शंतनजीव शर्मा

मैहतपुर (ऊना)। काम नहीं तो दाम नहीं, यह सख्त कानून जब एक मजदूर पर लागू हो सकता है तो हमारे देश के माननीयों पर लागू क्यों नहीं? लोकतंत्र के सबसे बड़े एवं पवित्र मंदिर में कामकाज कई-कई दिन तक ठप रहने से देश की जनता का करोड़ों रुपये फूंका जाता है। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर हमारे देश के इन माननीयों पर काम नहीं तो दाम नहीं, कानून लागू क्यों नहीं होता? एफडीआई के मसले को लेकर पैदा हुए गतिरोध के चलते पिछले कई दिन से संसद बार-बार ठप हो रही है। कोई बिल पारित नहीं हो रहा। कोई कामकाज नहीं हो पा रहा है। बीबीएमएम के प्रमुख विभाग में बतौर अधीक्षक सेवानिवृत्त और वर्तमान में मंडल भाजपा के उपाध्यक्ष शंतनजीव शर्मा ने साफ कहा कि जब सांसद में कोई कामकाज ही नहीं तो सांसदों पर भी यह कानून लागू होना चाहिए। सेवानिवृत्त एआरओ आरसी शर्मा भी ऐसी ही राय रखते हैं। कहते हैं कि नेता देश और समाज का आदर्श होते हैं। उन्हें आदर्श स्थापित करना चाहिए। पूर्व शिक्षक नेता जयदेव बाली के मुताबिक सांसदों को खुद यह तय करना चाहिए कि जिस दिन संसद नहीं चलती, उस दिन का वेतन स्वयं ही कट जाए, ऐसा कानून पारित करना चाहिए। मास्टर प्रेम स्वरूप कपिला ने भी काम नहीं तो दाम नहीं नीति को सही बताते हुए इसे सांसदों पर लागू किए जाने की मांग उठाई। हालांकि, पूर्व प्रिंसिपल एचसी शर्मा ने कहा कि होना तो ऐसा ही चाहिए, लेकिन करे कौन? कहा कि माननीय तो वही नियम बनाएंगे, जो उनके हित के होंगे। ऐसे में नो वर्क नो पे उन पर कैसे लागू हो पाएगा।

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