पानी स्वच्छ तो कैसे फैला डायरिया

बिलासपुर। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के सरकारी दावों पर यहां संतोष नहीं किया जा सकता। बिलासपुर में बनी पेयजल योजनाओं का पानी स्वच्छ होने का दावा किया जा रहा है। पानी के सैंपल भी ठीक होने की संबंधित महकमा बात कर रहा है लेकिन यदि पानी स्वच्छ है तो सर्दी के मौसम में कैसे डायरिया फै ल गया। सर्दी के मौसम में ही यह हाल है तो आगे आने वाली भीषण गर्मी और बरसात में क्या होगा। इस तरह के सवाल लोगों के जहन में उतर गए हैं।
बिलासपुर डिविजन की 147 में से महज दस योजनाओं में ही फिल्टर लगे हैं। अन्य तमाम योजनाएं भूमिगत जल पर निर्भर हैं। विभाग के अनुसार भूमिगत जल पर निर्भर पेयजल योजनाओं में फिल्टर लगाने की आवश्यकता नहीं रहती है। यदि यह मानक सही है तो फिर कैसे डायरिया फैल सकता है। ऐसे में सीवरेज की गंदगी पानी में मिलने की आशंका और प्रबल हो जाती है। गर्मियों में पेयजल किल्लत होना यह आम बात है। दूषित पानी से डायरिया जैसी बीमारियां भी सिर उठा लेती है। इस साल तो गर्मी के मौसम में ही शहर के डियारा सेक्टर में डायरिया फैल गया है। हालांकि, अब स्थिति नियंत्रण में है लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर डायरिया कैसे फैला। आईपीएच द्वारा लिए गए पानी के सैंपलों में भी किसी तरह की खोट नहीं पाई गई है। जानकारी के अनुसार डिविजन के तहत दस पेयजल योजनाएं डायरेक्ट पानी के स्रोत से चलाई जा रही है। इनमें बाकायदा फिल्टर भी लगे हुए हैं। 99 योजनाएं ऐसी है जो स्प्रिंग सोर्स पर आधारित हैं। जमीन से नालू लगाकर इन योजनाओं को पानी सप्लाई हो रहा है। दस योजनाएं इंफलेशन गैलरी और 28 अंडर ग्राउंड वाटर पर आधारित है। आईपीएच के अधिशासी अभियंता एसके धीमान का कहना है कि भूमिगत जल और स्प्रिंग सोर्स पर आधारित योजनाओं में फिल्टर लगाने की जरूरत नहीं रहती। ऐसे में बीमारी फैलने का कारण सीवरेज की लिकेज हो सकता है। इसके लिए अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं पर लीकेज रहती है तो उसे तुरंत ठीक करवाया जाएगा।

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