पोंटी चड्ढा ने ठेकों में चलाई थी ‘फ्रेंचाइजी व्यवस्था’

पोंटी चड्ढा हत्याकांड के बाद उसके कारोबार से जुड़ीं एक के बाद एक नई तस्वीर सामने आ रही है। उसने अपनी पहुंच का न सिर्फ सियासी बल्कि उद्योगपतियों के बीच भी खुलकर इस्तेमाल किया। पूरे उत्तर प्रदेश में तमाम ठेकों के पीछे पोंटी का नाम था लेकिन उसे दूसरे स्थानीय लोग चलाते थे। अपनी बैकिंग देने की एवज में पोंटी इन ठेकेदारों से मोटी रकम एकमुश्त ही लिया करते थे। कुल मिलाकर ठेकों में एक तरह से उन्होंने अपने नाम की फ्रेंचाइजी व्यवस्था लागू कर रखी थी।

चाहे खनन हो या मिड डे मील या राशन दुकानों पर दाल वितरण सभी कारोबारों में पोंटी की तूती बोलती थी। लेकिन तमाम स्थानों पर पोंटी खुद सामने आकर इन कारोबारों को नहीं करते थे बल्कि ठेकों में ठेका देते थे। खनन के कई काम उन्होंने प्रदेश में दूसरों को दे रखे थे, इसकी एवज में हिस्सा लेते थे। ठेकेदार उनके नाम का इस्तेमाल इसलिए करते थे क्योंकि उनका नाम आने के बाद ठेके बेरोकटोक चलते थे।

एक बार बिजनौर में एक जिलाधिकारी ने खनन रोक दिया था। बातचीत पर भी बात नहीं बनी तो पोंटी ने सरकार में ऊपर खटखटाया। सीधे हाई कमान का फोन डीएम के पास पहुंचा था और शाम को ही डीएम, सीडीओ और एडीएम का तबादला कर दिया गया था। जिन विभागों से संबंधित उनके कारोबार होते थे उन्हें वीटो पावर मिली हुई थी। अफसरों को बिल्कुल हस्तक्षेप करने की मनाही होती थी। इसलिए ही उनके साथ नाम जोड़कर दूसरे लोग काम करना चाहते थे।

हथियारों के लाइसेंस की जांच शुरू
पोंटी चड्ढा और उसके परिवार के सदस्यों को दिए गए हथियारों के लाइसेंसों की सरकार ने गुपचुप तरीके से जांच शुरू करा दी है। इस काम पर खुफिया एजेंसियों को लगाया गया है। खुफिया एजेंसियों को यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि पोंटी को कैसे इतने हथियारों के लाइसेंस मिल गए, जबकि लाइसेंस की जो जरूरी शर्तें हैं उनके अनुसार तो पोंटी के नाम एक भी लाइसेंस नहीं हो सकता था। इस जांच में उन अधिकारियों के लिए भी मुसीबत खड़ी हो सकती है जिनकी सहमति व संस्तुति पर लाइसेंस जारी किए गए हैं।

दरअसल, अब यह सवाल लोगों को चकरा रहा है कि जब लाइसेंस उन्हीं को देने का प्रावधान है जो उसे चलाने में सक्षम हों तो फिर पोंटी को लाइसेंस कैसे मिल गए। दो जिलों से सात-सात लाइसेंस जारी कर दिए गए। पोंटी और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर रामपुर और मुरादाबाद जिलों से सात-सात असलहों के लिए लाइसेंस जारी किए गए थे। पोंटी व उसके भाई की हत्या के बाद अधिकारियों को भी अब यह सवाल चकरा रहा है कि पोंटी तो अकेले हथियार चला नहीं सकता था। तब उसके हथियारों का इस्तेमाल कौन करता था।

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