
हिमाचल प्रदेश के कई सरकारी महकमों का खातों में एफडीआर के रूप में बजट जमा पड़ा है। फिर भी राज्य सरकार से अतिरिक्त बजट या ग्रांट-इन-एड की मांग की जा रही है। ऐसे ही कई महकमे बजट कुप्रबंधन के लिए कई महकमे जिम्मेवार हैं। ऐसे सारे विभागों पर प्रदेश सरकार के वित्त महकमे ने शिकंजा कस दिया है। उन पर वित्त विभाग का बजट डिविजन अपनी नजर रखेगा। इस तरह के विभागों की एफडीआर का रिकॉर्ड देखकर वित्त विभाग मांग के अनुसार उतने ही बजट की कटौती करेगा। इस संबंध में हाल ही में एक समीक्षा बैठक भी हो चुकी है। इसके बाद मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने वित्त विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह नियमानुसार कार्रवाई करे।
