
नई दिल्ली
दिल्ली की हवा आठ महीने में पहली बार बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई है। तापमान की कमी व हवा की चाल धीमी होने से मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के अंक पर पहुंच गया। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के पीछे पंजाब, हरियाणा समेत दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों पराली का धुआं बताया जा रहा है। हालांकि, यह अभी सिर्फ तीन फीसदी के करीब ही है। उधर, बुधवार के सूचकांक में एक अंक की भी बढ़ोतरी हवा की बेहद खराब कर देगी।
सफर के मुताबिक, दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में सोमवार को पराली जलाने के करीब 600 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। बीते तीन सालों में यह सबसे ज्यादा है। 2018, 2019 में इनकी संख्या 300 के आसपास ही रिकॉर्ड की गई थी। बावजूद इसके हवा की दिशा बदल जाने से धुएं का असर दिल्ली पर कम रहा। इसके उलट सुबह तापमान कम होने व हवा की चाल कम होने से सूचकांक 306 पर पहुंच गया था। लेकिन दिन की गरमी से प्रदूषण में कमी आई। दिन भर के उतार-चढ़ाव से सीपीसीबी का 24 घंटों का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 पर टिका रहा। इससे पहले हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर में 12 फरवरी का रिकार्ड की गई थी।
हवा की गुणवत्ता खराब होने की पीछे सफर का आकलन है कि पहले के अनुमान के मुताबिक हवा की दिशा उत्तर पश्चिमी से पूर्वी हो गई है, लेकिन बंगाल की खाड़ी से चलने वाली हवा की चाल बेहद कम थी। वहीं, दिल्ली में भी सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल धीमी रही। इससे प्रदूषक हवाओं में टिक गए और सूचकांक बेहद खराब स्तर तक पहुंच गया है। सफर का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों तक हालात में बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। हवा की गुणवता खराब और बेहद खराब की सीमा रेखा पर बनी रहेगी।
द्वारका में 400 के पास पहुंचा सूचकांक
बेशक दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक अभी 300 बना हुआ है, लेकिन द्वारका, वजीरपुर जैसे इलाकों में यह 400 के करीब पहुंच रहा है। बुधवार को दोनों इलाकों का सूचकांक 390 व 372 रिकार्ड किया गया जबकि मुंडका का सूचकांक 352 पर था।
