

वहीं, हिमाचल में इन्वेस्टर्स मीट के करीब एक लाख करोड़ के समझौता ज्ञापनों के बाद नए उद्योगों को धरातल पर उतारने की कवायद तेज कर दी गई गई है। सरकार की दलील है कि वैश्वीकरण की चुनौतियों का सामना करने और व्यवसाय के तरीकों में नियोक्ता के लिए लचीलापन और श्रमिकों को लाभ पहुंचाने को सरकार ने केंद्र के नियमों को आधार मानकर यह कदम उठाया है। राज्य में अभी औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 लागू थे। इस संशोधन के बाद नियोक्ता को तय समय अवधि के लिए रोजगार देने की छूट होगी। वर्तमान में प्रदेश के उद्योगों और अन्य संस्थानों में कामगारों की नियमित भर्तियां ही की जा सकती थीं। अगर किसी संस्थान में 50 से अधिक कामगार हैं तो संस्थान के बनाए नियम लागू होते थे। ये नियम श्रम एवं रोजगार और श्रमिकों को विश्वास में लेकर तैयार कर लागू होते रहे हैं।
अगर 50 से कम कामगार हैं तो श्रम विभाग के नियमों का पालन करना पड़ता है। संशोधन के बाद से नियोक्ता इच्छा के अनुसार तय सीमा के लिए कामगारों की नियुक्त कर पाएंगे। यह अवधि तीन माह से तीन साल तक भी हो सकती है। विभिन्न अधिनियमों के तहत बनाए जाने वाले रजिस्टरों/प्रपत्रों की संख्या कम करने और राज्य में विभिन्न श्रम कानूनों की आवश्यकताओं के अनुपालन उपायों के लिए मंत्रिमंडल ने विभिन्न श्रम नियमों के तहत हिमाचल प्रदेश अनुपालन सुगमता रजिस्टर नियम, 2019 को अपनाने का निर्णय लिया। सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह संशोधन किया है। इससे कामगारों का अहित होगा। श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रदान सचिव केके पंत ने कहा कि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार यह संशोधन किया है।
