
शिमला

विधायकों के बढ़ते असंतोष के ज्वार को कम करने और जिले की सियासी नब्ज पकड़ने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अब कांगड़ा को विशेष पैकेज देने के लिए कवायद शुरू की है। इसके तहत वीरवार को मुख्यमंत्री ने पहले तो लंच डिप्लोमेसी के तहत दोपहर के खाने से पहले बैठक कर कांगड़ा के विधायकों से उनकी समस्याएं जानीं, फिर समस्याओं के समाधान के लिए अपने कार्यालय में एक अधिकारी सिर्फ कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों की निगरानी के लिए नियुक्त कर दिया।
साथ ही लिखित में पत्र देकर उनसे अपने विस क्षेत्र की पांच प्रमुख लंबित निर्माण योजनाओं, मुख्यमंत्री की लंबित घोषणाओं के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे बेहद जरूरी व तात्कालिक रेफरेंस की जानकारी देने को कहा है। दरअसल, कांगड़ा जिले में विधायकों से लेकर आम लोगों में सरकार विरोधी माहौल की भनक लगने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे थामने के लिए नई पहल की। वीरवार की बैठक में विधायकों ने कोविड के चलते विधायक निधि फ्रीज किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधि काम नहीं करा पा रहे। ऐसे में लोगों में नाराजगी है।
विधायकों ने कहा कि अभी भी दो साल का समय है और समय से बदलाव कर लिए जाएं तो मिशन रिपीट के लिए कांगड़ा अहम भूमिका निभा सकता है। विधायकों की परेशानी को देखते हुए तय किया कि अब मुख्यमंत्री हर महीने कांगड़ा के विधायकों से बैठक किया करेंगे। साथ ही इस कवायद को अन्य जिलों तक भी शुरू किया जाएगा, ताकि विधायकों की बातें जानकर नियमित रूप से प्रस्तावों की जानकारी मुहैया कराई जा सके।
सियासी पंडितों की मानें तो मुख्यमंत्री आवास पर हुई कांगड़ा के विधायकों की बैठक के बाद जो कदम उठाने के लिए कदमताल शुरू की गई है, उससे साफ है कि मुख्यमंत्री जहां एक ओर कांगड़ा में बढ़ते सियासी असंतोष को थामने का प्रयास करने में जुट गए हैं। सरकार को रिपीट कराने के मिशन को भी जमीनी तौर पर सूबे के सबसे बड़े सियासी गढ़ कहे जाने वाले कांगड़ा जिले से ही शुरू कर जिले को तवज्जो दिए जाने का संदेश भी देने की कोशिश करना चाह रहे हैं ताकि असंतोष को कम किया जा सके।
गुटबाजी जारी, पवन राणा के खिलाफ फिर गरजे धवाला
सीएम से बैठक के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान भाजपा के वरिष्ठ विधायक रमेश धवाला ने पार्टी के संगठन महामंत्री पवन राणा के खिलाफ फिर मोर्चा खोल दिया। धवाला ने कहा कि प्रदेश में वैसे तो कोई सियासी घमासान नहीं है, लेकिन कुछ लोग विधायकों की बजाय किसी समानांतर व्यवस्था खड़ी कर उन्हें प्राथमिकता देने की कोशिश कर रहे हैं।
राणा का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें संगठन का काम करना चाहिए और सरकार व जन सेवा का काम विधायकों पर छोड़ देना चाहिए, क्योंकि विधायक जनता के प्रति जवाबदेह हैं न कि संगठन महामंत्री। वहीं मंत्रियों के दौरे और घोषणाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय विधायक से चर्चा कर ही घोषणाएं की जानी चाहिए।
