
पतलीकूहल (कुल्लू)। हिमालय क्षेत्र में हो रही बर्फबारी ग्लेशियरों की सेहत के लिए शुभ संकेत मानी जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में अरसे बाद हुई ताबड़तोड़ बर्फबारी को ग्लेशियरों के लिए संजीवनी माना जा रहा है।
कुल्लू के मौहल स्थित जीवी पंत हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डा. जेसी कुनियाल का मानना है कि बर्फबारी होने से ग्लेश्यिरों पर स्नोकैप ही नहीं बढ़तीहै, बल्कि सूर्य की किरणों को आसमान में प्रतिबिंबित करने से ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी है।
नदियों में साल भर पानी की प्रचुरता रहने से हाइडल प्रोजेक्ट अधिकतम बिजली का उत्पादन कर सकेंगे। इतना ही नहीं ग्लेशियरों पर रिसर्च कर रहे वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डा. मिलाप का कहना है कि भारी बर्फबारी से सिंचाई के लिए नदियों में पानी भरपूर रहने से इंडो-गंगेटिक क्षेत्र में अच्छी फसल आने की उम्मीद है। फलोत्पादन के लिए भी हिमपात वरदान से कम नहीं है। उत्तर भारत के हिमाचल और जम्मू कश्मीर की पांच हजार करोड़ की सेब की फसल के भी बेहतर रहने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
