

हिमाचल में जून 2019 तक योजना के तहत 12.63 लाख खाते खोले गए हैं। इनमें से 86,586 खातों में आज तक एक बार भी लेनदेन नहीं हुआ। इस कारण ये खाता धारक केंद्र सरकार से मिलने वाले दो लाख रुपये के दुर्घटना बीमा कवर से वंचित हो गए हैं।
मंगलवार को राजधानी शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 153वीं बैठक में यह खुलासा हुआ। बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधान सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना की सुस्त रफ्तार पर भी नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि योजना से संबंधित 898 मामले अभी भी लंबित हैं। सिर्फ 362 मामले मंजूर हुए हैं। इस पर बैंकों के प्रतिनिधियों ने उद्योग विभाग पर ठीकरा फोड़ते हुए उनके पास अभी इतने अधिक आवेदन नहीं आने की बात कही।
इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रधान सचिव ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति और उद्योग विभाग से 15 अक्तूबर तक इस बाबत रिपोर्ट देने को कहा। बैठक के दौरान सार्वजनिक बैंकों के प्रतिनिधियों ने सरकारी पैसा निजी बैंकों में ज्यादा जमा होने पर एतराज जताया।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बैंक ही प्रदेश और केंद्र सरकार की योजनाओं को चला रहे हैं जबकि सरकार के डिपॉजिट निजी बैंक ले जा रहे हैं। बैठक के दौरान प्रधान सचिव ने नवंबर मेें प्रस्तावित इन्वेस्टर मीट को सफल बनाने के लिए बैंकों से पूरा सहयोग देने का आह्वान भी किया।
बैठक में यूको बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ एके गोयल, डीजीएम जेएन कश्यप, महाप्रबंधक आरबीआई केसी आनंद, महाप्रबंधक नाबार्ड निलय डी कपूर सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बैंकों में 10 से 4 बजे तक ही होगी पब्लिक से डीलिंग
बैंक बंद रहने पर एटीएम भी ठप होने पर लगाई फटकार
प्रधान सचिव ने बैंकों की छुट्टियों के दौरान एटीएम ठप रहने पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने जब नकदी नहीं मिलने से विशेषकर सैलानियों को भारी परेशानी होती है। जब अस्पतालों और पुलिस की सेवाएं जारी रह सकती हैं तो एटीएम पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता।
वित्तीय जागरूकता शिविरों को फंडिंग का बदलेगा पैट्रन
नाबार्ड के सहयोग से हर माह बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले वित्तीय जागरूकता शिविरों की फंडिंग का पैट्रन भी बदल दिया गया है। अब इन शिविरों की समीक्षा की जाएगी। देखा जाएगा कि शिविर के बाद कितने नए लोग बैंक से जुड़े। इसके बाद नाबार्ड द्वारा शिविर के लिए फंड जारी किया जाएगा।
