

मामले के अनुसार 2016 में एक निजी चैनल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक स्टिंग दिखाया था। इस स्टिंग में रावत सरकार बचाने के लिए विधायकों से सौदेबाजी करते नजर आ रहे थे। इस दौरान कांग्रेस के कुछ विधायक भाजपा में शामिल हो गए और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया था। राष्ट्रपति शासन लगाने का मामला पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, फलस्वरूप रावत सरकार बहाल हो गई थी।
हरीश रावत ने सीबीआई जांच के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी
हरीश रावत ने सीबीआई जांच के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर सुनवाई जारी है। भाजपा में शामिल हो चुके पूर्व कांग्रेसी नेता हरक सिंह रावत ने भी इस मामले में एक याचिका दायर की थी। हरीश रावत पर एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए कहा था कि सीबीआई जांच रद्द करने संबंधी राज्य कैबिनेट की बैठक विधि मान्य नहीं थी। मामले में 21 अगस्त को हुई सुनवाई में सीबीआई ने सीबीआई ने स्टिंग मामले की प्रारंभिक जांच पूरी कर लिए जाने की जानकारी अदालत को दी थी और शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था। ताजा सुनवाई में सीबीआई ने अदालत को बताया कि वह इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जा रही है।
