इंजीनियरिंग में घटा हिमाचल के युवाओं का रुझान, खाली रह गईं सीटें

हमीरपुर
फाइल फोटो
सूबे के युवाओं का इंजीनियरिंग से रुझान घटने लगा है। निजी कॉलेजों में तो सीटें खाली रहती ही हैं, लेकिन पहली बार सरकारी कॉलेजों में भी सीटें नहीं भरी जा सकी हैं। प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर के अधीन प्रदेश में करीब 44 कॉलेज हैं।

यहां इंजीनियरिंग, एमबीए, एमसीए और फार्मेसी समेत अन्य तकनीकी विभागों में शिक्षा दी जा रही है। तकनीकी विवि ने जुलाई से इन कॉलेजों में सीटें भरने को तीन चरणों में काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की थी। तीन राउंड के बाद भी खाली रहीं सीटें भरने को स्पॉट राउंड भी करवाया गया, लेकिन इसमें भी करीब डेढ़ सौ सीटें ही भरी गईं।

हालात यह हैं कि प्रदेश के तीन सरकारी कॉलेजों में ही सीटें खाली रह गई हैं। जवाहर लाल नेहरू राजकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय सुंदरनगर में टेक्सटाइल विभाग, राजकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय प्रगतिनगर शिमला में इलेक्ट्रॉनिक्स और राजकीय महाविद्यालय ज्यूरी में मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में कई सीटें खाली हैं। तीन दर्जन से अधिक निजी कॉलेजों में भी कई सीटें खाली हैं। इसके चलते निजी कॉलेज प्रबंधनों को स्टाफ के वेतन का भुगतान में दिक्कतें हो सकती हैं।

बीते वर्ष प्रदेश के कुछ निजी कॉलेजों में प्रशिक्षित स्टाफ की कमी को लेकर धरना प्रदर्शन हुआ था। न्यायालय के आदेशानुसार महाविद्यालयों में 15 अगस्त तक कक्षाएं शुरू करनी हैं। 15 अगस्त के बाद अब कोई नया दाखिला नहीं हो सकता। इसके चलते निजी कॉलेज प्रबंधक परेशान हैं।

हिमाचल प्रदेश तकनीकी विवि के डीन अकादमिक डॉ. कुलभूषण चंदेल ने कहा कि 14 अगस्त शाम तक सभी महाविद्यालयों में स्पॉट एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है। 15 अगस्त से सभी कॉलेजों में कक्षाएं शुरू करने के निर्देश हैं। उन्होंने माना कि कुछेक सरकारी महाविद्यालयों में सीटें खाली रही हैं। 17 अगस्त के बाद प्रदेश के सभी कॉलेजों से सीटों को लेकर पूरी जानकारी मिल पाएगी।

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