

उन्होंने जानकारी दी कि योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2019-20 में 50 हजार कृषकों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 12 जिलों में स्थित 80 खंडों में 1600 खंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाए जाएंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सोमवार को शिमला में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत जैविक और शून्य लागत प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्यस्तरीय कार्य बल की बैठक हुई।
इसमें ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान’ और कृषि, पशुपालन एवं प्राकृतिक खेती से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई। अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश के लोग वर्षों से कृषि तथा बागवानी के क्षेत्र से आजीविका प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश के किसानों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष इस योजना के तहत 12 जिलों में 2669 किसानों ने प्राकृतिक कृषि को अपनाया है।
प्रशासनिक अधिकारियों को कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल के भ्रमण को भेजा
प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों को कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल के भ्रमण पर भेजा गया था, जिससे प्रदेश में प्राकृतिक खेती को अपनाने में विभिन्न स्तरों पर होने वाली प्रक्रियाओं को समझने और अपनाने में सहायता मिली है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव पशुपालन संजय गुप्ता, प्रधान सचिव कृषि ओंकार चंद शर्मा, प्राकृतिक खेती के प्रदेश परियोजना निदेशक राकेश कंवर, निदेशक कृषि, निदेशक बागवानी तथा निदेशक पशुपालन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
