खाद्य सुरक्षा पर रंग बदल रही मोदी सरकार?

जब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर भारतीय संसद में बहस हो रही थी तो भाजपा के नेता सबसे आगे बढ़कर कह रहे थे कि यह कानून और ज्यादा मजबूत होना चाहिए। सरकार में आने के बाद हमें कहा जा रहा है कि इस अधिनियम का समर्थन भाजपा ने महज चुनावों के मद्देनजर किया था, अन्यथा पार्टी इसके ख‌िलाफ है।

भाजपा नेता शांता कुमार के अध्यक्षता में बनी एक उच्च स्तरीय समिति ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत दिए जाने वाले अधिकारों में कटौती की सिफारिश की है। समिति की सिफ़ारिशें इस अधिनियम को कमज़ोर करेंगी। अपनी तमाम खामियों के बावजूद बिहार जैसे राज्यों में इस अधिनियम को लागू करने से आम लोगों को काफी लाभ मिला है।

भारत के पूर्व खाद्य-मंत्री और भाजपा नेता शांता कुमार ने हाल ही में बयान दिया कि पिछले साल खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर भाजपा का समर्थन एक बहाना था। शांताकुमार की अगुवाई में बनी एक उच्च स्तरीय समिति ने भारतीय खाद्य निगम के बारे में एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें खाद्य सुरक्षा अधिनियम में कटौती की सिफारिश की गई है।

यह अधिनियम तीन तरह के अधिकारों की गारंटी देता है। इसके अंतर्गत बच्चों को पोषाहार देना, मातृत्व लाभ देना तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए सस्ते दर पर खाद् पदार्थ देना शामिल है।

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