क्या पहाड़ पर चढ़ पाएगी मोदी की रेल?

मोदी पर टिकी हैं हिमाचलवासियों की उम्मीदें

मोदी पर टिकी हैं हिमाचलवासियों की उम्मीदें

हिमाचल को रेल बजट में क्या मिलेगा, इसका पता थोड़ी ही देर बाद चल जाएगा। नरेंद्र मोदी के पहले रेल बजट से हिमाचल को बहुत उम्मीदें हैं। इसके दो कारण हैं। एक तो हिमाचल भाजपा प्रभारी के रूप में कई साल प्रदेश में बिताने वाले मोदी यहां की जरूरत को जानते हैं और दूसरा मोदी खुद ये वादा कर गए थे कि हिमाचल को रेल विस्तार की जरूरत है?

इस कारण एक ओर जहां पुराने रेल प्रोजेक्टों के सिरे चढ़ने की आस है, वहीं सामरिक महत्व की बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन पर भी कोई घोषणा होने की उम्मीद है। हालांकि, इससे पहले कई वर्षों से रेल बजट में हिमाचल की अनदेखी होती रही है। जो नई रेल लाइनें सर्वे के लिए भी बजट में दिखाई जाती हैं, उनको भी बजट नहीं मिलता।

क्या पहाड़ पर चढ़ पाएगी मोदी की रेल?

पढ़िए, क्या कहा था मोदी ने?

पढ़िए, क्या कहा था मोदी ने?

मेरे जीवन में हिमाचल का बड़ा महत्व है। यहां आकर ऐसा लगता है, जैसे अपने घर आया हूं। यहां से जाते ही गुजरात में बड़ी जिम्मेदारी मिली थी। हिमाचल को कुदरत ने खूब सुंदर बनाया है।

लेकिन यहां पर्यटन को विकसित करने की जरूरत है। ऐसा रेल विस्तार से ही हो सकता है। पहाड़ों की जरूरत अलग होती हैं। यदि मुझे आपकी सेवा का मौका मिला तो हिमालयी राज्यों के लिए अलग नीति बनाएंगे। चुनाव के दौरान मोदी ने यह भाषण हिमाचल में दिया था।

प्रदेश सरकार ने भी उठाई अपनी मांगें

प्रदेश सरकार ने भी उठाई अपनी मांगें

रेल बजट से पहले केंद्र सरकार के सामने हिमाचल की कांग्रेस सरकार की ओर से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और भाजपा की ओर से सभी सांसदों ने अलग अलग पैरवी केंद्र सरकार में की है। इनमें दो मुख्य मांगें हैं। पहले ये कि भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेल लाइन पर काम शुरू किया जाए। दूसरा कि इसे आगे मंडी-मनाली होते हुए लेह तक ले जाने के लिए राष्ट्रीय महत्व प्रोजेक्ट कैटेगिरी में डाला जाए।

हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने ऊना से हमीरपुर रेल लाइन के सर्वे, नंगल-ऊना-तलवाड़ा रेल लाइन के लिए ज्यादा बजट देने, अंदौरा तक रेल लाइन के विद्युतीकरण, अंब में रेल की सफाई की सुविधा देने और नंगल तक आने वाली सभी रेल सेवाएं ऊना तक करने की मांग उठाई है। पठानकोट आने वाले धौलाधार एक्सप्रेस की संख्या बढ़ाने और पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल लाइन को मंडी तक बढ़ाने की मांग भी उठी है।

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