
शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के गृह क्षेत्र शिमला संसदीय सीट पर मत प्रतिशतता के असंतुलन ने सबको चौंका दिया है। वीरभद्र का खुद का शिमला ग्रामीण विधानसभा हलका उन विधानसभा क्षेत्रों में शुमार है, जहां पर 60 फीसदी से कम मत पड़े हैं। शिमला लोकसभा सीट के 17 में से 9 हलकों में कांग्रेस और 8 में भाजपा का असर माना जाता रहा है। निर्दलीय विधायकों वाली दो सीटों में से चौपाल कांग्रेस और पांवटा साहिब भाजपा के प्रभाव में मानी जाती है। कांग्रेस के प्रभाव वाले हलकों शिमला ग्रामीण और ठियोग में तो 60 प्रतिशत से कम मत पडे़। बाकी में 70 फीसदी तक या इससे कम ही है। भाजपा के असर वाला शिमला शहर ही ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है, जहां से 60 प्रतिशत से कम वोट पडे़ हैं। भाजपा के वर्चस्व वाले पांवटा, नालागढ़, पच्छाद तथा नाहन में 70 प्रतिशत पार मतदान हुआ है। इसका क्या अर्थ निकाला जाए? भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि पूरे देश में मोदी की लहर है। इसी लहर से रिकार्ड मत पड़े हैं। लोगों में कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश है। वह अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। कांग्रेस प्रत्याशी मोहनलाल ब्राक्टा बताते हैं कि मतदान का ट्रेंड कांग्रेस के पक्ष में साफ नजर आ रहा है।
इनसेट
शिमला संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले विधानसभा हलके
विधानसभा क्षेत्र पार्टी मत प्रतिशत
अर्की भाजपा 60
नालागढ़ भाजपा 68
दून कांग्रेस 71
सोलन कांग्रेस 67
कसौली भाजपा 70
पच्छाद भाजपा 72
नाहन भाजपा 72
श्रीरेणुकाजी कांग्रेस 65
पांवटा साहिब निर्दलीय 76
शिलाई भाजपा 65
चौपाल निर्दलीय 56
ठियोग कांग्र्रेस 57
कसुम्पटी कांग्रेस 55
शिमला भाजपा 59
शिमला ग्रामीण कांग्रेस 58
जुब्बल-कोटखाई कांग्रेस 61
रोहडू़ कांग्रेस 66
