
कुल्लू। देवभूमि कुल्लू की कुल पौने चार लाख की आबादी का सफर महज पांच दर्जन बसों पर चल रहा है। हालांकि कुल्लू डिपो में निगम के बेड़े में कुल 137 बसें हैं। इसमें से अधिकतर बसों को निगम ने लंबी दूरी के चंडीगढ़, दिल्ली, देहरादून तथा जम्मू आदि कमाऊ रूटों में कमाई के मकसद से सेवाओं में लगा रखा है। वहीं 27 बसें अपनी माइलेज पूरी कर खटारा हो चुकी हैं।
अधिकारियों के अनुसार लंबी दूरी के 95 रुटों में 60 से अधिक बसें सेवाएं दे रही हैं, वहीं लोकल 100 के करीब रुटों पर विभाग ने महज 60 के करीब बसों को जिला की जनता की सुविधा के लिए लगा रखा है। ग्रामीण बाला राम ठाकुर, किशन लाल, सोहन सिंह, राम लाल, रमेश ठाकुर और तिलक राज आदि ने कहा कि विभाग ने हाल के दिनों में उनके गांव को चलने वाली निगम की बसों में कटौती की है। निगम का ध्यान जिला के नागरिकों की सुविधा देने के बजाए कमाई पर केंद्रित होकर रह गया है। आनी के कमल ठाकुर, निरमंड के प्रेम ठाकुर और खराहल के अमित शर्मा ने कहा कि परिवहन मंत्रालय को इस बदहाल स्थिति तथा निगम की कमाऊ मानसिकता को बदलने की गुहार लगाई। बसों की कमी के चलते रूटों पर चलने वाली बसों में यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। जिसके कारण निगम की बसों में सफर करना किसी खतरे से खाली नहीं है। उनके इलाके के रूटों पर अधिक खटारा बसों को चलाया जाता है।
इस संदर्भ में एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक पवन कुमार शर्मा ने कहा कि बसाें की कमी के चलते यह समस्या आ रही है। कुल्लू डिपो में कुछ और नई बसों को शामिल किया जा रहा है। निगम लोगों को बेहतर यातायात सुविधाएं देने के लिए प्रयासरत है।
