फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला रद्द

शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट ने हत्यारोपी को बरी करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) धर्मशाला के फैसले को रद्द कर दिया। अपीलकर्ता केवल कृष्ण को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश राजीव शर्मा की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मामले के साक्ष्यों को अगर बारीकी से परखा जाए तो उसके दृष्टिगत अपीलकर्ता के खिलाफ दोष साबित नहीं होता। विशेषतया जो साक्ष्य निचली अदालत के समक्ष पेश किए गए, वे परिस्थितियों के दृष्टिगत विश्वसनीय नहीं हैं। कोर्ट ने यह पाया कि घटना वाले दिन सोनू खुले आंगन में सो रहा था। साथ ही आम रास्ता था। इस स्थिति में कोई भी बंदूक से फायर कर फरार हो गया होगा। इसका दोष अपीलकर्ता पर मढ़ दिया गया। कोर्ट के अनुुसार अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि वास्तव में आरोपी उस बंदूक का इस्तेमाल कर था, जिसकी गोली लगने से सोनू की मौत हो गई थी।
अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट के समक्ष रखे तथ्यों के अनुसार आरोपी ने सांजवान (कांगड़ा) में मछली फार्म ले रखा था। सोनू बतौर ड्राइवर आरोपी के साथ काम कर रहा था। उसे आरोपी द्वारा चेतराम नामक व्यक्ति के सामने जान से मारने की धमकी दी गई थी। झगड़ा अचानक कुत्ते की मौत को लेकर हुआ था। 2 जून, 2006 की रात को जब सोनू सो रहा था तो आरोपी ने सोनू की छाती पर गोली दाग दी। गोली चलने की आवाज के बाद हालांकि रेखा रानी और उषा रानी उठ गईं, लेकिन घर में बिजली न होने के कारण चांदनी में उन्होंने आरोपी को बंदूक के साथ देखा। उस समय चह बैसाखियों के सहारे था। निचली अदालत ने हालांकि अपीलकर्ता को दोषी पाया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, मगर हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव के चलते अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 से आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषमुक्त करार दिया।

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