
हरोली (ऊना)। गेहूं के तोल में गोलमाल पर पंजाब से आए तीन व्यापारियों की किसानों ने धुनाई कर दी। इन ठगों वहां से खदेड़ दिया। तीनों व्यापारी गेहूं खरीद के लिए पंजाब के होशियारपुर इलाके से जीप ट्राला लेकर ऊना पहुंचे थे। खेत में ही किसानों से गेहूं खरीदकर यह ठग एक के बाद दूसरे खेत का रुख कर रहे थे। इन्होंने 1500 रुपये क्विंटल के हिसाब से पंडोगा इलाके से गेहूं की खरीद शुरू की। कई जगह 1550 रुपये क्विंटल के हिसाब से मोलभाव किया।
हालांकि, खेतों में ही गेहूं की थ्रैशिंग में जुटे किसानों से यह एक या दो क्विंटल गेहूं देने के लिए कह रहे थे। कुछ किसानों ने इन व्यापारियों के कहने पर इन्हें एक या दो क्विंटल गेहूं दे भी दिया। जब यह तीनों व्यापारी पंडोगा क्षेत्र के किसान बलवीर के खेत में पहुंचे तो वहां भी थ्रेशिंग का काम चल रहा था। इन्होंने दो क्विंटल गेहूं देने को कहा। इस पर बलवीर ने परिवार के अन्य लोगों को खेत में रहने को कहा और खुद व्यापारियों को लेकर घर चले गए। उन्होंने व्यापारियों को घर में दो ड्रम दिखाए।
व्यापारियों ने साथ लाए तराजू से ड्रमों में भरे गेहूं को तोला और कहा कि यह 220 किलो है। तभी बलवीर का माथा ठनका और उन्होंने कहा कि प्रत्येक ड्रम में 125 से 130 किलो गेहूं आता है। पिछले कई सालों से इन ड्रमों में वे गेहूं भरते आ रहे हैं। व्यापारी भी अपनी बात पर अड़े रहे। बलवीर ने पास में ही भूपेंद्र सिंह की दुकान पर जाकर वही गेहूं की खेप तुलवाई तो यह 253 किलो निकली। लोग भी वहां एकत्रित हुए और पूरा गड़बड़झाला किसानों की समझ में आ गया।
बलवीर ने बताया कि अधिक कीमत का झांसा देकर यह ठग तोल में गड़बड़ी करके किसानों से छल कर रहे थे। कुछ युवकों ने इन व्यापारियों की खासी धुनाई कर दी। इसके बाद इन ठग व्यापारियों ने माफी मांगी और जीप लेकर होशियारपुर की ओर भागे। कुछ किसानों से इन्होंने गेहूं की करीब आठ बोरियां खरीदी थी। किसान रविंद्र, सूरज सिंह, काहन सिंह, जोगराज ने कहा कि जिन किसानों ने इन्हें गेहूं बेचा है हो सकता है उनके साथ भी तोल के दौरान धोखा हुआ हो।
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ठगों के झांसे में न आएं
ऊना कृषि उत्पाद एवं विपणन समिति के सचिव भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1400 रुपये क्विंटल निर्धारित किया है। हालांकि, ऊना की मंडी में आढ़तियों ने 1410 रुपये रेट खोल दिया है। जब कोई व्यापारी इससे बहुत ही ज्यादा कीमत देकर गेहूं खरीदने आए तो किसान भी अलर्ट रहें। किसी के झांसे में आकर खून पसीने की कमाई न लुटाएं।
