
कांगड़ा। पहले सोलन के साधु पुल से जमीन छिनने और अब योग सभाओं की अनुमति रद्द होने के बाद योगगुरु बाबा रामदेव के तल्ख तेवर नजर आए। घुरकड़ी में उपनयन संस्कार समारोह के मंच पर भाजपा प्रत्याशी शांता कुमार को अपने दाएं तरफ बिठाकर योगगुरु ने समर्थकों को अध्यात्म के बहाने इशारों ही इशारों में सियासी शिक्षा भी दे डाली। कहा, करीब दस करोड़ की लागत से सोलन के साधुपुल में योगपीठ बनाया था लेकिन साधुपुल से साधु को ही भगा दिया।
चुनाव आयोग की पैनी नजरों से बचते हुए बाबा ने यदा यदा ही धर्मस्य… श्लोक के उच्चारण का शंखनाद करते ही शांता के पक्ष में परोक्ष रूप से हवा तैयार की। शायद इसलिए उन्होंने अप्रत्यक्ष तौर पर कह दिया कि हिमाचल की देवभूमि में देवत्व का ही चयन होना चाहिए और देवत्व का आधार व्यक्ति हो। संकेत वह इशारों में शांता कुमार की तरफ दे रहे थे। यज्ञोपवीत समारोह के दौरान रामदेव ने शांता कुमार को भी तिलक लगाया और कहा कि अब आपको किसी की नजर नहीं लगी।
उन्होंने कहा कि पहले भगवान राम ने धनुष उठाया, तो श्रीकृष्ण ने सुदर्शन लेकिन अब काम ही आसान है न धनुष न सुदर्शन सीधा बटन। ऐसे में सब काम छोड़कर सात मई को अच्छे लोगों को वोट दें। मंच पर उन्होंने काले धन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल के लोग भोले जरूर हैं, इन्हें कभी धार्मिक तो कभी राजनैतिक नजरिये से कोई बहका देता है। वहीं, गुजरात के लोग नाजुक लेकिन बहादुर होते हैं। हिमाचल का छोड़ने का उनका दिल नहीं करता।
