
शिमला। चेक नहीं कैश चाहिए… वह भी एक लाख… तभी आपरेशन होगा… वरना अपना मरीज वापस वार्ड में ले जाओ। एक दूसरे शख्स की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसने भी तो एक लाख नगद दिए हैं। इसके मरीज का आपरेशन हो जाएगा। चेक से काम नहीं चलेगा। तीमारदार गिड़गिड़ाते रहे लेकिन सप्लायर और डाक्टर पर कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिर तीन घंटे बाद बिना आपरेशन के मरीज को वार्ड में ले जाना पड़ा। इंसानियत की सभी हदों को लांघते हुए यह वाक्य बुधवार को आईजीएमसी के आपरेशन थियेटर में हुआ।
बीपीएल परिवार से है सुरेश
65 साल के सुरेश कुमार बिलासपुर के रहने वाले हैं। पेशे से किसान है। यह बीपीएल और आईआरडीपी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। काफी समय से अस्वस्थ चल रहे हैं। इनका हिप ज्वाइंट रिप्लेसमेंट का आपरेशन होना है। इस पर दो लाख खर्च का अनुमान है। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से आपरेशन खर्च की राशि दी गई है। डाक्टरों के कहे अनुसार बुधवार सुबह साढ़े नौ बजे मरीज को आपरेशन थियेटर ले जाया गया। तीमारदार निश्चिंत थे कि आज आपरेशन हो जाएगा। इसका वे काफी लंबे समय से इंतजार कर रहे थे लेकिन वहां जो घटा उससे उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
इसने भी तो दिया है एक लाख
मरीज सुरेश की बेटी नीलम शर्मा ने कहा कि आपरेशन थियेटर में सप्लायर ने उनसे पैसे मांगे जिस पर उन्होंने एक लाख का चेक दिया। इसी बीच डाक्टर आए और कहने लगे चेक से काम नहीं चलेगा। एक लाख नगद दो। तभी आपरेशन होगा। सप्लायर ने उदाहरण दिया कि यहां खड़े इस व्यक्ति ने भी तो नगद दिए हैं। पैसा नहीं तो आपरेशन नहीं। मरीज के अन्य तीमारदार लक्ष्मी दत्त और नरेश शर्मा ने भी डाक्टर और सप्लायर से आग्रह किया और कहा कि पैसा एकत्रित कर कुछ देर में दे देते हैं तब तक आपरेशन तो करो। आरोप है कि डाक्टर नहीं माना। मरीज को मजबूरन दोपहर एक बजे वार्ड में भेज दिया।
आपरेशन थियेटर में बैठते हैं सप्लायर
मामला अस्पताल प्रबंधन के पास पहुंचा। तह तक जाने पर मालूम हुआ कि आपरेशन में अधिकांश सामान निजी कंपनी के सप्लायरों के माध्यम से आपरेशन थियेटर तक पहुंचता है। सप्लायर थियेटर के भीतर ही रहते हैं। आपरेशन तभी होता है जब सप्लायर डाक्टर को हरी झंडी दे देते हैं कि पैसा आ चुका है। सप्लायर के मना करने पर आपरेशन टल जाता है। इस मामले में भी यही हुआ।
दुकानदारी बंद करवाए सरकार : विनोद
आईजीएमसी कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद चौहान ने कहा कि 2007 में भी वीरभद्र सरकार के समक्ष यह गुजारिश की गई थी कि आपरेशन थियेटर में आने वाले सप्लायरों की दुकानदारी तुरंत प्रभाव से बंद होनी चाहिए। सप्लायरों का आपरेशन थियेटर में आने का क्या औचित्य बनता है? इसका प्रबंधन जवाब दें। तत्कालीन सरकार ने यह कुप्रथा बंद करवा दी थी लेकिन यह फिर शुरू हो गई। मुख्यमंत्री से आग्रह है कि वह प्रिंसिपल और एमएस को सख्त आदेश दें कि यह दुकानदारी को बंद करवाएं। जिससे गरीब मरीजों को राहत मिल सके। कालेज का नाम बदनाम न हो। आईजीएमजी और टांडा का एक कैडर किया जाए।
आज हो जाएगा मरीज का आपरेशन : एमएस
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि सप्लायर, डाक्टर और तीमारदारों के बीच आपसी सामंजस्य के कारण यह स्थिति पैदा हुई। सप्लायर का यह कहना था कि वह चेक इसलिए नहीं ले रहा था क्योंकि पेमेंट फंस जाती है। छुट्टी होने के बावजूद संबंधित डाक्टर आज आपरेशन करने के लिए आए थे। उन्होंने वायदा किया है कि वीरवार को इस मरीज का आपरेशन कर दिया जाएगा।
