
शिमला (सोनिया)स्वयंभू कर्मचारी नेता सुरेंद्र मनकोटिया की हरकत ने प्रदेश के कर्मचारी वर्ग को शर्मसार किया है। उन्हें 30 मार्च को छोटा शिमला पुलिस ने 24 बोतल शराब के साथ गिरफ्तार किया था। यह पहली घटना नहीं है, बल्कि तथाकथित स्वयंभू कर्मचारी नेता पर पहले भी कई गंभीर आरोप लगे हैं। तथ्यों के साथ साक्ष्य जांच को विजिलेंस के सुपुर्द कर दिए गए हैं, लेकिन मामले को खंगालने की जगह दबाया जा रहा है। यह बात प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष एसएस जोगटा, महासचिव हेम सिंह ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज्ञान ठाकुर, संयुक्त सचिव राजीव चौहान, वित्त सचिव सुदामाराम शर्मा, उपाध्यक्ष गंगाराम डोगरा, पदम ठाकुर, सुरेश शर्मा और प्रेस सचिव एमआर वर्मा ने जारी एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कही।
तथ्य दिए, जांच आगे नहीं बढ़ी : जोगटा
प्रदेशाध्यक्ष एसएस जोगटा ने कहा कि कई बार साक्ष्यों के साथ सरकार से स्वयंभू कर्मचारी नेताओं के खिलाफ जांच मांगी गई। विजिलेंस को तथ्य दिए, लेकिन तफ्तीश आगे नहीं बढ़ी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कर्मचारी हितैषी हैं, लेकिन इनके इर्द-गिर्द के तीन अफसर भ्रष्टाचारियों को पनाह दे रहे हैं और सरकार को बदनाम कर रहे हैं। चुनाव आयोग से स्वीकृति लेकर सरकार कर्मचारी महासंघ को मान्यता दे। मनकोटिया गुट पर प्रहार करते हुए जोगटा ने कहा कि इस गुट के अध्यक्ष के काले कारनामे सार्वजनिक हो चुके हैं। इनकी टीम से जुड़े पदाधिकारी सरकारी सीमेंट और सरिया चोरी तक के मामलों में संलिप्त रह चुके हैं।
अपने गिरेबान में झांके जोगटा : मनकोटिया
प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह मनकोटिया ने कहा कि एसएस जोगटा दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें। पूर्व कर्मचारी नेता गोपाल दास वर्मा पर सरकारी नौकरी लगाने की एवज में लाखों रुपये ऐंठने का आरोप है और उनके खिलाफ पुलिस में भी मुकदमा दर्ज है। यह वही गोपाल दास हैं, जो बीते करीब डेढ़ साल एसएस जोगटा गुट के पक्ष में सरकार से मान्यता की मांग करते रहे हैं। जोगटा इस बात को कर्मचारियों के सामने सार्वजनिक करें कि गोपाल दास के साथ उनकी कितनी हिस्सेदारी है।
