
कुल्लू(भाग सिंह) घाटी में हो रही बर्फबारी और मूसलाधार बारिश से पेयजल स्रोतों को संजीवनी मिल गई है। इससे जहां आने वाली गरमी में पेयजल की किल्लत नहीं रहेगी, वहीं सूखने की कगार पर पहुंचे स्रोत भी पानी से लबालब हो गए हैं। ऐसे में आईपीएच विभाग भी गदगद है। गर्मियों के दिनों लोगों को पर्याप्त पानी मुहैया करवाने के लिए हमेशा चिंतित रहने वाले आईपीएच विभाग को मौसम ने बड़ी राहत दी है। कुल्लू सर्कल के तहत आने वाली 875 पेयजल योजनाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। लिहाजा, लोगों को पानी की किल्लत से जूझना नहीं पड़ेगा। अप्रैल शुरू होने वाला है, बावजूद इसके घाटी की चोटियां बर्फ की मोटी परत से लकदक हैं। इतना ही नहीं, इन दिनों हो रही बारिश भी कुछ हद तक जलस्रोतों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। उधर, पर्यावरण वैज्ञानिक भी जिला में हो रही बर्फबारी तथा बारिश को पेयजल स्रोतों के लिए मददगार मान रहे हैं। आईपीएच के कनिष्ठ अभियंता सेस राम आजाद ने कहा कि संभवत: आने वाली गर्मियों के मौसम में आईपीएच को बड़ी राहत मिलेगी। ग्रामीण लाल चंद, तेज राम, हरि राम, सेस राम, अमित, राहुल, कमल ठाकुर, रमेश तथा राम लाल का कहना है कि इस बार जाड़े में बर्फबारी के साथ-साथ बारिश का दौर काफी रहा है। ऐसे में आने वाले समर मौसम में पेयजल की समस्या से लोगों को मदद मिलेगी।
875 योजनाओं को मिलेगा लाभ
बर्फबारी तथा बारिश से स्टोरेज पेयजल स्रोतों से 875 पेयजल योजनाओं में गर्मियों के दिनों भरपूर पानी आने की उम्मीद है। आईपीएच सर्कल कुल्लू के तहत 192 लाहौल घाटी, 226 आउटर सराज डिवीजन तथा कुल्लू-1 और कुल्लू-2 की 457 योजनाओं को लाभ होगा।
बाक्स
इस साल जाड़े में हो रही बर्फबारी तथा बारिश से पेयजल स्रोतों के रिचार्ज होने से गर्मियों में लोगों को पेयजल किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा। लेकिन, बर्फ का जल्द पिघलना तथा लंबे समय तक जमे न रहना चिंता का विषय है।
डॉ. एसएस सामंत, प्रभारी जीबी पंत, हिमाचल इकाई मौहल
घाटी में सिलेसिलेवार हुए हिमपात तथा बारिश से पेयजल स्रोत काफी हद तक स्टोरेज हुए हैं। इससे सूख रहे पेयजल स्रोतों को भी काफी मदद मिली है और विभाग को पानी की सप्लाई में भी आसानी होगी।
पीवी वैद्य, अधीक्षण अभियंता आईपीएच कुल्लू
