नए उद्योगों पर मेहरबान, पुराने हो रहे वीरान

मैहतपुर (ऊना)। सूबे में औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने के लिए नए औद्योगिक क्षेत्राें को स्थापित करने का सरकार का ऐलान स्वागत योग्य है। लेकिन पुराने उद्योग जो सरकारी ऑक्सीजन के बिना वीरान होते जा रहे हैं, उनके बारे में प्रदेश सरकार ने अपने बजट में कोई रुचि नहीं दिखाई है। सूबे की रीढ़ माने जाने वाले लघु उद्योगों की दिक्कतों का आज भी कोई पुख्ता हल नहीं हो पाया है।
वैट में असमानता के कारण प्रदेश का लघु उद्योग निरंतर कमजोर होता जा रहा है, जबकि पंजाब में लघु एवं मध्यम उद्योग के लिए अलग नीति है, लेकिन हिमाचल सरकार ने अपने बजट में ऐसा कोई ऐलान न करके लघु उद्योगों को निराश ही किया है। गुड्स टैक्स का बोझ लादे सिसक-सिसक कर चल रहे लघु उद्योगों पर लगे एजीटी अतिरिक्त गुड्स टैक्स की मार से उभारने के लिए सरकार के इस ताजा बजट में कोई पहल नजर नहीं आई है। ऐसा मानना है कि लद्यु उद्योगों को चलाने वाले उद्यमियों का।
ऊना जिला के पंडोगा में नया औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन मैहतपुर जैसे सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र को पिछले एक दशक से फेज दो का झुनझुना देकर स्थानीय उद्यमियों को बजाने के लिए अपने रहमोकरम पर ही छोड़ देना, उद्योग जगत को विकसित करने का पैमाना नहीं हो माना जा सकता। मैहतपुर में इस वक्त डेढ़ सौ से ज्यादा लघु उद्योग पंजीकृत हैं, लेकिन स्थानीय उद्योगों को पेश आ रही दिक्कतों को दूर करने के सार्थक प्रयास न होने से आज इस औद्योगिक क्षेत्र की दशा कोमा में पड़े किसी मरीज की तरह बन चुकी है। जिसका वजूद तो है, पर कर कुछ भी नहीं पा रहा है।

किसी ने कहा अच्छा, किसी ने फीकी चाय
हालिया बजट को मैहतपुर उद्योग संघ के पूर्व अध्यक्ष बलराम चंदेल ने अच्छा कहा, तो पूर्व अध्यक्ष पीसी शर्मा ने फीकी चाय जैसा बताया। पूर्व अध्यक्ष सीआर कौशल ने कहा कि अच्छा होता अगर बजट में लघु उद्योग के लिए वैट, एजीटी, प्लास्टिक उद्योग को आ रही दिक्कतों की दूर करने की राहत दी गई होती। उधर शिवसेना के कार्यकारी प्रंातीय अध्यक्ष शिवदत्त वशिष्ठ ने बजट को पुरानी बोतल में नई शराब भरने की संज्ञा दी है।

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