
बद्दी (सोलन)। ‘डॉट्स पक्के इलाज का पक्का वादा’ इसी स्लोगन के साथ टीबी की जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लेकिन पक्के इलाज के वादे से मरीज नाता तोड़ रहे हैं। दवाओं का कोर्स पूरा नहीं करने के चलते मौत का बुलावा दे रहे हैं। यही वजह हो सकती है कि औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में क्षय रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बद्दी पीएचसी स्थित डॉट्स सेंटर में तीन वर्ष के आंकड़े से यही जाहिर हो रहा है।
डॉट्स सेंटर में तीन वर्ष पहले जहां 50 रोगी पंजीकृत थे, वहीं अब रोगियों की संख्या साढ़े तीन के करीब हो गई है। नियमित रूप से दवाई नहीं लेने तथा लापरवाही बरतने के चलते बीमारी एक से दूसरे में फैल रही है। 72 रोगी केटेगिरी-टू में उपचाराधीन है। हैरानी इस बात की है कि केटेगिरी-टू में आने के बाद भी चार रोगियों ने दवाई नहीं लेने पर इन्हें रोगी मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) के लिए धर्मपुर रेफर किया गया। यहां पर रोगी का कल्चर टेस्ट होने के बाद दवाई शुरू की गई है।
बद्दी में प्रवासी कामगार इस रोग की चपेट में अधिक आ रहे है। खान-पान और बेहतर आवासी सुविधा न होने से यह क्षय रोग की चपेट में आ रहे है। इस रोग का समय पर उपचार करने पर रोगी स्वस्थ हो जाता है, लेकिन शुरूआती दिनों मे रोगी झोला छाप डाक्टरों के चक्कर में रहता है। जब हालात बिगड़ जाती है तो वह सरकारी अस्पताल पहुंचता है। इस बीमारी के रोगी को परहेज रखना बेहद जरूरी है। ऐसा न करने पर बीमारी एक से दूसरे में फैसली है। झुग्गियों में रहने वाले एक कामगार को बीमारी होती है तो सावधानी न बरतने पर साथी भी इसकी चपेट में आ जाते हैें।
कोट
नालगाढ़ के बीएमओ डा. कुलदीप जसवाल ने बताया कि नियमित दवाओं से इसे बीमारी से मुक्ति मिल सकती है। लेकिन कुछ रोगी ऐसे हैं जो दवाई नियमित नहीं लेते। थोड़े ठीक होने पर इलाज अधूरा छोड़ देते हैं। केटेगिरी वन के रोगी थोड़े समय दवाई लेने के बाद पलायन कर जाते हैं। नियमित दवाई के अभाव में ऐसे रोगी केटेगिरी-टू में चले जाते है। लापरवाही बरतने पर चार कामगार एमडीआर में चले गए इन्हें यहां से धर्मपुर में उपचार कराने के बाद उन्हें दवाईयां दी जा जा रही है। रोगियों की सुविधा के लिए निजी अस्पतालों में भी डॉट सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
