
हमीरपुर। प्रदेश सरकार शिक्षकों के प्रति उदसीन रवैया अपनाए हुए है। प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये से हिमाचल प्रदेश प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक संघ में रोष व्याप्त है। संघ पदाधिकारियों ने बुधवार को हमीरपुर में आयोजित बैठक में निर्णय लिया कि संघ का एक प्रतिनिधिमंडल नियमितीकरण के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को मांगपत्र सौंपेगा। इस दौरान संघ के प्रदेशाध्यक्ष बीएल धर्माणी ने बताया कि वर्ष 2002 में नियमित पदों की भर्ती के लिए शुरू हुई चयन प्रक्रिया में भाग लेने के बावजूद 6 से 10 वर्षाें तक का लंबा इंतजार करना पड़ा और शिक्षकों को अनुबंध आधार पर नियुक्तियां दी गईं। वर्ष 2002 में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक के करीब 800 पदों को नियमित आधार पर भरने की प्रक्रिया शुरू हुई, उस समय अनुबंध का प्रावधान नहीं था। एसएसबी मेडिकल व नॉन मेडिकल, टीजीटी के साक्षात्कार के परिणाम की प्रक्रिया पूरा कर चुका था। जबकि टीजीटी आर्ट्स का साक्षात्कार होना बाकी था। वर्ष 2008 व 2009 में उच्च न्यायालय के आदेश से सरकार ने टीजीटी को अनुबंध आधार पर नियुक्तियां दीं। टीजीटी आर्ट्स के साक्षात्कार 2011 में हुए, उन्हें 2012 में नियुक्तियां दी गईं। शिक्षकों को नियमित की बजाए अनुबंध पर नियुक्तियां दी गईं, जो अन्याय पूर्ण है। बैठक में संघ के प्रदेश संयोजक बलदेवराज शर्मा, उपाध्यक्ष राजेश कुमार, महासचिव लेखराज, कोषाध्यक्ष सुरेश कुमार, सचिव अजीत पाल, नरेश कुमार, अमित कुमार, गुरदेव, संजय कुमार, बोधराज, ऊपा पटियाल, राकेश कुमार, सतीश कुमार, राज कुमारी, महेंद्र कुमार, गोपाल शर्मा, राकेश कुमार, आदर्श शर्मा, रोशन लाल, लीला शर्मा, कुलदीप सिंह, अनु कुमार, अनिल कुमार, जोग्रिंद सिंह, रामपाल, जगदीश चंद, विजय कुमार व शिवचरण आदि उपस्थित थे।
