जटेहड़ को किसकी नजर लगी

पतलीकूहल (कुल्लू)। पतलीकूहल के साथ लगते जटेहड़ गांव में तीन महीनों में चार लोग विभिन्न हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। खास बात यह है कि इनमें से चारों ही अपने माता-पिता के इकलौते चिराग थे। करीब तीन माह पहले इसी गांव के बुद्धि प्रकाश की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई थी। दो सप्ताह पहले पत्रकार विक्रमजीत कापोता सड़क हादसे का शिकार हो गया। ताजा हादसे में लाहौल के ग्रांफू में जटेहड़ निवासी संजीव और नरेश बर्फबारी में अपनी जान गंवा बैठे। एक साथ दो चिताएं जलती देख समूचा जटेहड़ कराह उठा। पंचायत प्रधान सतीश चंद का कहना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में इससे पहले इस गांव में दो चिताएं कभी जलती नहीं देखी थीं। दो युवकों की अकाल मौत से इलाके में मातम छाया हुआ है। दोनों ही मृतकों के परिजन सदमे के दौर से गुजर रहे हैं। अकाल मृत्यु का शिकार बने इन चार लोगों को देख कर अब लोगों के जहन में सवाल कौंधने लगा है कि आखिर जटेहड़ गांव को किस की नजर लग गई है। बीडीसी मेंबर दलीप कुमार का कहना है कि संयोगवश जिस समय मृतक युवकों के शवों को गांव लाया जा रहा था तो उससे पहले लंबे समय से बीमार चल रहे मृतक नरेश के मामा चंदु की भी लंबी बीमारी से मौत हो गई। हादसों में इस तरह युवकों के मारे जाने को लोग देव प्रकोप से जोड़कर भी देख रहे हैं।

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