
कुल्लू। नशे की तस्करी के लिए बदनाम कुल्लू घाटी में चरस के मामले कम होने लगे हैं। पुलिस महकमे के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो वर्ष 2011 में जहां चरस तस्करी के दो सौ मामलों में 154 व्यक्ति सलाखों के पीछे पहुंचे हैं, वहीं 2012 में इन आंकड़ों में कमी दर्ज की गई है। इस वर्ष 156 मामले सामने आए। इनमें 128 तस्करों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जबकि इस बार मात्र 96 मामले ही सामने आए हैं। इसमें केवल 71 तस्करों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। मात्र तीन सालों में चरस के मामलों में इतनी ज्यादा गिरावट आना घाटी के लिए शुभ माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि चरस तस्करी के मामलों में गिरावट आने का एक कारण यह भी है कि पुलिस ने जिले की तमाम पहाड़ियों में दस्तक देकर वहां भांग की खेती को नष्ट किया है। करीब दो दशकों से कुल्लू घाटी पूरे विश्वभर में नशीले पदार्थों खासकर चरस की तस्करी के लिए मशहूर रही है। इसके चलते जिला के तमाम पहाड़ों में उगने वाली भांग की खेती को नष्ट करने का कार्य भी पुलिस ने शुरू किया था।
एसपी कुल्लू विनोद धवन का कहना है कि जिला कुल्लू में चरस तस्करी के मामलों में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसका कारण यह है कि पुलिस ने जिला की तमाम घाटियां में जाकर भांग की खेती को नष्ट कर लोगों को जागरूक करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि स्वयं ही लोगों का रुझान नशे की खेती और तस्करी से कम होता जा रहा है, जो जिला के लिए सुखद संकेत है।
