
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। महज दो सर्दियों का इंतजार…। उसके बाद छह माह तक बर्फ की कैद में रहने वाले लाहौलियों की जिंदगी बदल जाएगी। बीआरओ ने 8.8 किलोमीटर लंबी रोहतांग टनल को फरवरी 2015 तक खोलने का लक्ष्य रखा गया है। उसके बाद चंद मिनटों में लोग रोहतांग दर्रे को पार कर सकेंगे। टलन के नार्थ और साउथ दोनों पोर्टल से खुदाई हो रही है। नार्थ पोर्टल से 1995 मीटर और साउथ पोर्टल से 2300 मीटर टनल खोद दी है। नार्थपॉटल में जिस गति से कार्य को अंजाम दिया जा रहा है उससे साफ जाहिर है कि बीआरओ अपना लक्ष्य समय अवधि में हासिल करेगा। रोहतांग टनल के खुलने का सिर्फ लाहौलवासियों नहीं बल्कि पूरे देश के लोगों को इंतजार है। सामरिक महत्व की इस टनल से सेना अपना रसद चीन सीमा तक आसानी से पहुंचा सकेगी। हालांकि, रविवार को लाहौल की ओर से नार्थ पोर्टल का कार्य बंद कर दिया गया है। अब इसको आगामी सीजन तक रोहतांग दर्रा खुलने के बाद ही शुरू किया जाएगा। बीआरओ का दावा है कि टनल की खुदाई में बड़ी बाधा पार कर ली है, लेकिन अब मौसम रोड़ा बना हुआ है।
टनल के बन जाने के बाद लाहौल के लोगों को सर्दियों में बर्फ की कैद से रिहाई मिल जाएगी। वहीं, हेलीकॉप्टर का इंतजार भी लगभग खत्म हो जाएगा।
लाहौल के वयोवृद्ध इतिहासकार छेरिंग दोरजे ने बताया कि रोहतांग टनल के बन जाने से इसका फायदा सिर्फ लाहौलवासियों को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को होगा। टनल सुरक्षा की दृष्टि से भी अहम है। उन्होंने बताया कि 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान मनाली-लेह मार्ग अपनी अहमियत साबित कर चुका है। टनल के बन जाने से भारतीय सेना की लाइफ लाइन को और गति मिलेगी। उधर, टनल के इंचार्ज एवं बीआरओ के ओसी बीआर राव ने बताया कि टनल निर्माण का लक्ष्य फरवरी 2015 तक रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहाड़ के दोनों ओर से चार किलोमीटर से अधिक टनल निर्माण कार्य पूरा हो गया है। उन्होंने पुष्टि की है कि नार्थ पोर्टल में रविवार को टनल निर्माण का कार्य बंद कर दिया गया है। अब इसका कार्य आगामी रोहतांग दर्रा खुलने के बाद शुरू किया जाएगा।
