बिजली के तार बने जी का जंजाल

बिलासपुर। हिमाचल सहित देश के पांच राज्यों में ऊर्जा क्रांति लाने के लिए अपना सब कुछ गंवाने वाले बिलासपुर वासियों के लिए यही बिजली ‘खतरनाक’ साबित हो सकती है। भाखड़ा विस्थापितों के शहर में बने तारों का जाल जी का जंजाल बना हुआ है। शॉट सर्किट से भड़की छोटी सी चिंगारी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। बिजली के अलावा टेलिफोन, केबल नेटवर्क और अन्य कई तारें एक ही जगह से होकर गुजर रही है।
शहर की सभी मार्केट का यही हाल है। बिजली पोल में कई घरों को कनेक्शन दिए गए हैं। इससे तारों के जंजाल बन गए हैं। हैरत यह है कि घनी आबादी वाले बाजारों में भी एचटी लाइन गुजारी गई है। जबकि ऐसे इलाकों में केबल के माध्यम से बिजली की सप्लाई होनी चाहिए थी। शुक्रवार रात्रि भी यहां आगजनी की घटना में एक दुकान जलकर राख हुई है। हालांकि, स्थानीय लोगों एवं अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने आग पर काबू पा लिया। अन्यथा यह घटना बड़ी तबाही का रूप भी धारण कर सकती थी। इस घटना के बाद शहर में बिजली लाइनों को व्यवस्थित करने के साथ ही तारों के जंजाल खत्म करने की जरूरत बड़ी शिद्दत के साथ महसूस की गई।

बोले लोग
गांधी मार्केट के सुमन कुमार शर्मा कहते हैं कि बिजली लाइन दुरुस्त होनी चाहिए। विभाग को चाहिए कि वह बिजली लाइन को सुव्यवस्थित तरीके से बिछाएं। जितेंद्र गुप्ता के अनुसार शहर की बिजली लाइन पुराने ढर्रे पर बिछाई गई है। बड़ी लाइनों के लिए बाजार में केबल लाइन की व्यवस्था होनी चाहिए। हीरा लाल के अनुसार यह हाल अकेले गांधी मार्केट का ही नहीं बल्कि पूरे बिलासपुर शहर का है। गुलाम रब्बानी (गुड्डू) ने बताया कि गांधी मार्केट में हुई आगजनी के बाद तारों को बदला जा रहा था कि अचानक दोपहर को भी शॉट सर्किट हो गया। लिहाजा, शहर में बिछाई गई लाइन बेहतर होनी चाहिए।

बॉक्स
जहां-जहां इस तरह के प्वाइंट है उन्हें ठीक कर दिया जाएगा। केबल बदलने का कार्य एक विशेष प्रोजेक्ट के तहत चला है। डीपीआर में जहां-जहां का प्रोविजन होगा, वहां पर बिजली लाइन अपग्रेड होगी। जरूरत पड़ी तो नया प्रोजेक्ट बनाकर भी तारों को बदला जा सकता है। लगभग पांच किलोमीटर लाइन को बदला जाना है।
-ओपी चंदेल, अधिशासी अभियंता (बिजली बोर्ड)

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