
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय में हाल फिलहाल हुए सबसे बड़े मार्कशीट फर्जीवाड़े की पुलिस जांच कछुआ चाल से चल रही है। पुलिस का तर्क है कि मुख्य आरोपी संविदा कर्मी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। जिसकी चार्जशीट भी न्यायालय में दाखिल की जा चुकी है, शेष नामजद अभियुक्तों के बारे में विवेचना जारी है।
मालूम हो कि कुमाऊं विश्वविद्यालय में जमा परीक्षा आवेदन फार्मों की जांच के दौरान छह अप्रैल को फर्जी अंक तालिकाएं पकड़ में आई थीं। इस मामले में तत्कालीन कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने जांच समिति गठित की थी। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने लेखा विभाग के संविदा कर्मी नंदन सिंह देव को दोषी पाते हुए बर्खास्त कर दिया था। परीक्षा आवेदनों की समूची पड़ताल के बाद 6 जून 2013 को उप कुलसचिव (परीक्षा) दिनेश चंद्र ने बर्खास्त संविदा कर्मी नंदन समेत पीजी कालेज रुद्रपुर की बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा दीपा रानी, इसी महाविद्यालय की बीए प्रथम वर्ष की सुनैना, पीजी कालेज खटीमा के बीए प्रथम वर्ष के हीरा सिंह खड़का, एमबीपीजी कालेज हल्द्वानी के बीए प्रथम वर्ष के अखिलेश बिष्ट, इसी कालेज की बीए प्रथम वर्ष की बबीता व अन्य 17 के खिलाफ मल्लीताल कोतवाली में तहरीर दी थी। जिस पर कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 468, 471, 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया।
जांच अधिकारी एसआई विपिन चंद्र पांडे का कहना है कि मुख्य आरोपी नंदन को गिरफ्तार करने के बाद उसकी चार्जशीट भी न्यायालय में दाखिल की जा चुकी है। शेष आरोपियों के खिलाफ विवेचना जारी है। इधर, पुलिस की विवेचना पांच माह में पूरी न होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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विवेचनाधिकारी का हो चुका है तबादला
नैनीताल। कुमाऊं विवि के चर्चित प्रकरण में पुलिस का जवाब है कि विवेचना जारी है। लेकिन वास्तविकता यह है कि मामले की जांच कर रहे एसआई पांडे लगभग तीन माह से केदारनाथ ड्यूटी पर थे। ऐसे में उस दौरान जांच नहीं हो सकी। इधर उनका स्थानांतरण अल्मोड़ा जिले को हो गया है, लेकिन उन्हें अभी तक कोतवाली मल्लीताल से रिलीव नहीं किया गया है। इसी कारण संबंधित जांच अभी श्री पांडे के पास है। ब्यूरो
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प्रोविजनल मार्कशीट देना किया बंद
नैनीताल। कुमाऊं विवि के उप कुलसचिव दिनेश चंद्र ने बताया कि फर्जी मार्कशीट प्रकरण के बाद से विवि ने प्रोविजनल मार्कशीट देना बंद कर दिया है। क्योंकि आरोपियों ने प्रोविजनल मार्कशीट के आधार पर ही परीक्षा में शामिल होने की कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि डुप्लीकेट मार्कशीट मांगे जाने पर सख्ती बरती जा रही है। इसमें दो-दो कर्मचारियों से पड़ताल कराई जा रही है।
