छह माह बर्फ में कैद रहेंगी 28 पंचायतें

कुल्लू। आधिकारिक तौर पर 13050 फुट ऊंचा ऐतिहासिक रोहतांग दर्रा 15 नवंबर से बंद हो जाएगा। हालांकि, मौसम का मिजाज बेहतर रहने से दर्रा पर वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। खास बात यह है कि जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के हजारों लोगाें की दिक्कतों का दौर अगले कुछ ही दिन में शुरू होने वाला है। मौसम की करवट बदलते ही सूबे का यह जनजातीय क्षेत्र बर्फ के आगोश में जकड़ जाएगा। इससे यहां की 28 पंचायतों की 26 हजार आबादी इसकी जद में आएगी और पूरा जिला शेष विश्व से अगले छह माह तक लिए अलग-थलग पड़ जाएगा। हालांकि, घाटी का स्पीति उपमंडल वाया किन्नौर बहाल रहेगा। इधर, जिला के लाहौल घाटी के लोगों को जाड़े में किसी तरह की समस्या न हो, ऐसे में जिला प्रशासन ने खाद्य एवं जीवनरक्षक दवाइयों का भंडारण कर लिया है। सर्दियों में बर्फ की मोटी परत जमने से लाहौल घाटी की जनता को मई-जून तक बाहरी दुनिया का इंतजार करना पड़ता है। घाटी से 12 माह तक शेष विश्व से जुड़े रहने के लिए घाटी के तिंदी, तिंगरेट, उदयपुर, वारिंग, रावा, तांदी डाइट, स्तींगरी, जिस्पा, सिस्सू, लोसर, काजा, सगनम, ताबो, चौखंग आदि हैलीपेडों के लिए उड़ानें होती हैं। लोगों को 2016 में रोहतांग टनल के तैयार होने तक मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। अगले छह माह तक यहां लोगाें का आवागमन हेलीकाप्टर से होता है। उधर, बीआरटीएफ-38 के कमांडर कर्नल योगेश नायर ने बताया कि उनकी ओर से रोहतांग दर्रा को ज्यादा से ज्यादा दिनों तक बहाल रखने की कोशिश रहेगी।
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सर्दियों के दिनों में जिला के दर्जन से अधिक हैलीपेडों के लिए हवाई उड़ानों की सुविधा है। घाटी के लोगों के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री का हर घर में भंडारण कर दिया गया है। बर्फबारी में कुछेक समस्याएं पेश आ सकती हैं। बावजूद इसके प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए प्रयासरत है।

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