रोहतांग में काला पड़ने लगा बर्फ का रंग

पतलीकूहल (कुल्लू) मनाली के रोहतांग दर्रे पर वाहनों की आवाजाही से भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन हो रहा है। इसके चलते अब रोहतांग समेत आसपास के ग्लेशियरों का रंग काला पड़ने लगा है। लिहाजा, ग्लेशियरों के सिकुड़ने से चिंतित इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन) के वैज्ञानिक दल ने इसके अध्ययन को रोहतांग के समीप कोठी में एक ऑब्जर्वेटरी स्थापित की है। इस कार्य में इसरो के त्रिवेंद्रम स्थित विक्रम सारावाई स्पेस रिसर्च सेंटर के प्रमुख वैज्ञानिक डा. के कृष्णामूर्ति और जीवी पंत पर्यावरण अध्ययन संस्थान मौहल के वैज्ञानिक डा. जेसी कुनियाल जुट गए हैं। डा. कुनियाल ने बताया कि ऑब्जर्वेटरी का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। अध्ययन में बात सामने आई है कि रोहतांग समेत साथ लगते धुंधी ग्लेशियर में एयरोसोल की मात्रा खतरनाक स्थिति तक पहुंच गई है। ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में जहां ग्लेशियरों के सिकुड़ने और बदरंग होने के लिए कार्बन को जिम्मेदार माना जा रहा है, वहीं अगम्य बफार्नी इलाकों तक इंसानी आवाजाही के बढ़ने को भी मुख्य कारक के तौर पर देखा जा रहा है। आगामी अध्ययन को ऑब्जर्वेटरी में कुछ और वैज्ञानिक उपकरणों की स्थापना की जा रही है।

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