
हमीरपुर। स्वास्थ्य विभाग हर बार त्योहारी सीजन में मिठाइयों के सैंपल भरता है। दिवाली सीजन में विभाग ज्यादा सक्रिय होता है। सैंपल इसलिए भरे जाते हैं कि जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो। लेकिन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ फिर भी हो रहा है। विभाग सैंपल तो भरता है लेकिन उसकी रिपोर्ट करीब एक माह बाद आती है। तब तक त्योहार बीत जाता है और लोग भी मिठाइयों को हजम कर जाते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जनता की सेहत से खिलवाड़ नहीं रुक रहा है। हालांकि सैंपल फेल होने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई या फिर जुर्माना लग सकता है। मामला न्यायालय भेजा जाता है। यदि दुकानदार का व्यवसाय 12 लाख रुपये तक है तो एडीएम को कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है।
नादौन, बड़सर, पट्टा, लदरौर में विभाग ने पिछले साल दिवाली पर ढाई क्विंटल मिठाई को नष्ट किया है।
अभी तक भरे है 58 सैंपल
मौजूदा साल में स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न खाद्य पदार्थों के 58 सैंपल भरे हैं। इनमें से 49 की रिपोर्ट विभाग के पास पहुंच चुकी है। तीन सैंपल फेल हुए हैं जबकि दो सैंपल मिस ब्रांड्रेड के हैं। नौ सैंपलों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। सैंपल फेल होने पर विभाग ने संबंधित दुकानदारों को नोटिस जारी कर दिए है। करीब आधा दर्जन दुकानों से खराब मिठाई मौके पर फिंकवाई है। इस दिवाली के अवसर पर विभाग ने नादौन में दबिश दी थी। इस दौरान विभाग ने करीब डेढ़ क्विंटल मिठाई मौके पर फिंकवाई है।
2012 में दो सैंपल मिस ब्रांडेड
वर्ष 2012 में विभाग ने मात्र 34 खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे थे। इनमें से दो सैंपल मिस ब्रांडेड और दो सैंपल संदेहास्पद पाए गए थे। 30 सैंपलों की रिपोर्ट सही पाई गई थी। इनमें तरल पेय पदार्थ, मिठाइयों, मेवा, दूध और दही के सैंपल लिए गए थे। विभाग ने वर्ष 2012 में करीब एक दर्जन दुकानों से क्विंटल से अधिक मिठाई मौके पर से फिंकवाई है। दोबारा खराब मिठाइयां न रखने की हिदायत भी दी है।
स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कार्रवाई करता है। दुकानों से सैंपल भी भरे जाते हैं जिन्हें जांच के लिए कंडाघाट भेजा जाता है। सैंपल फेल होने पर कार्रवाई की जाती है।
-पीआर कटवाल, सीएमओ, हमीरपुर
जांच को कंडाघाट भेजे जाते हैं सैंपल
जांच के लिए सैंपल कंडाघाट भेजे जाते हैं। सैंपल की जांच को करीब तीन से चार सप्ताह का समय लगता है। सैंपल फेल पाए जाने पर संबंधित दुकानदारों को नोटिस भेजा जाता है। संबंधित खाद्य पदार्थ के बारे में पूछताछ की जाती है। इसके बाद मामला न्यायालय में भेजा जाता है जहां संबंधित दुकानदार को सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। हाल ही में एक दुकानदार को तीन साल का कारावास हुआ है।
