घर में मक्की, खेतों में धान खत्म

ऊना। बेमौसमी बरसात ने जिले में कहर बरपाया है। खेतों में पड़ी मक्की और धान की फसल बर्बाद हो गई है। बारिश से पहले घरों में पहुंचाई गई फसल भी धूप न मिलने के कारण बर्बाद हो रही है। बारिश के कारण बड़े नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा है। मौसम के अभी भी खुलने की संभावनाएं नजर नहीं आ रही हैं। बेमौसमी बरसात के कारण किसानों की कमर टूट गई है। मक्की के साथ अब धान की फसल भी खेतों में ही तबाह होने का खतरा बन गया है। कई स्थानों पर धान की फसल खेतों में बिछ गई है।
अवतार सिंह, राज कुमार, शशि राणा, राम सिंह, राजेंद्र शर्मा, सुखविंद्र सिंह, जगदेव राणा, सतीश बांका, धनी राम, सुभाष चंद, रणजोध सिंह और खुशी राम का कहना है कि बारिश से पूर्व खेतों में से बचाकर घर पहुंचाई मक्की भी नमी का शिकार होती जा रही है। फसलों की कटाई का काम खत्म होने के बाद मक्की को धूप लगवाना जरूरी होता है, जिससे उसमें मौजूद नमी को पूरी तरह गायब कर खाने लायक बनाया जा सके, लेकिन धूप न निकलने के कारण मक्की के सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
मक्की के दानों का रंग भी काला होने लगा है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि ऊपरी हिमाचल के बागवानों की तरह मैदानी क्षेत्र के किसानों को भी नुकसान की एवज में मुआवजा दिया जाए। उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डा. एचएस राणा का कहना है कि नुकसान के संदर्भ में विभाग को सूचित कर दिया गया है।

Related posts